सबसे अधिक लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश की हाईप्रोफाईल सीट मैनपुरी समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव यहां से जीते थे। लेकिन उन्होने इस सीट को छोड़ कर आजमगढ़ को चुना। जिसके बाद उनके पोते तेजप्रताप सिंह यादव मैनपुरी से सांसद बने। मुलायम सिह यादव मैनपुरी से कई बार सांसद रह चुके हैं।
मुलायम सिंह यादव ने पहली बार 1996 में यहां से चुनाव लड़ा था और 50 हजार वोटों के अंतर से जीतकर संसद पहुंचे थे। 1998 और 1999 में भी ये सीट समाजवादी पार्टी के खाते में ही रही। जातीय समीकरणों को देखे तो इस सीट पर यादवों का बोलबाला रहा है। करीब 35 फीसदी मतदाता यादव समुदाय से आते हैं। जबकि ढाई लाख के करीब वोटर शाक्य हैं। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी का वर्चस्व इस सीट पर कायम रहा है।
2014 के आंकड़ों के अनुसार इस सीट पर करीब 16 लाख वोटर हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर का असर मैनपुरी की सीट पर देखने के नहीं मिला था। मुलायम सिंह के सीट छोड़ने के बाद हुए उपचुनाव में उनके पोते तेजप्रताप को 65 प्रतिशत वोट मिले थे। मुलायम सिंह यादव ने 2004 में भी मैनपुरी से जीतने के बाद सीट छोड़ी थी। जिसके बाद धर्मेंद्र यादव यहां से उपचुनाव जीते थे। लेकिन मुलायम सिंह ने 2009 यहां से जीतने के बाद सीट को अपने पास ही रखा था।
इस बार यादव परिवार का कुनबा बिखर गया है। क्योंकि मैनपुरी लोकसभा सीट के अंतर्गत ही जसंवतनगर विधानसभा आती है। जो मुलायम सिंह के भाई शिवपाल यादव का विधानसभा क्षेत्र है। ऐसे में यादव वोटरों का बिखरना संभव है। कहने को वो कह चुके हैं कि मैनपुरी में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे लेकिन जिस तरह से शिवपाल, नामांकन के वक्त भी नदारद रहे, वो बढ़ी हुई दूरियों को दिखाता है। साथ ही जिस सूबे में उनकी पार्टी 79 सीटों पर मजबूती से लड़ने का दम भर रही हो, वहां मैनपुरी पर इसका बिल्कुल असर नहीं होगा, ऐसा मुश्किल लगता है।