सिलीगुड़ी में आयोजित 'भारत के मन की बात कार्यक्रम' में भाजपा नेता सह राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि ऐसे समय में जब पुलवामा में हुए आतंकी हमले के कारण पूरे देश के लोगों में गुस्सा है, तब दुर्भाग्य से ममता बनर्जी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की भाषा बोल रही हैं।
दासगुप्ता ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। अभी देश के सामने रोहिंग्या का खतरा और जेहादी संगठनों का थ्रेट भी है। ऐसे में राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सभी राजनीतिक दलों को एक साथ रहना चाहिए, एक भाषा बोलनी चाहिए ।
दासगुप्ता ने पुलवामा हमले के संदर्भ में कहा कि इसके लिए पूरा देश पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरा रहा है। घटना के तुरंत बाद जैश-ए-मुहम्मद के आतंकवादी ने वीडियो जारी कर घटना की जिम्मेदारी ले ली। फिर भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बोल रही हैं कि बिना जांच के पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का ऐसा मानना काफी दुभाग्यपूर्ण व दु:खद है। वह जिस फेडरल फ्रंट के सहारे राष्ट्रीय पटल पर एक मजबूत भूमिका निभाना चाहती हैं, उसकी विदेश नीति ऐसी ही रहने वाली है क्या? दासगुप्ता ने अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा की तारीफ करते हुए कहा कि वर्ष 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले के बाद पूरा देश आतंकवाद के साए से घिरा हुआ था। यह स्थिति 2014 के बाद से काफी बदल गई है। अब आतंकवाद केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित रह गया है। हालांकि मैं यह नहीं कहता हूं कि हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहना चाहिए। इसलिए सरकार अपने स्तर से हर जरूरी कदम उठा रही है।
राज्य और केंद्र में टकराव पैदा करना चाह रहीं ममता
भाजपा नेता ने बंगाल सरकार पर देश के संघीय व्यवस्था में अवरोध पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस व्यवस्था में कुछ अधिकार केंद्र सरकार के और कुछ अधिकार राज्य सरकार के पास होते हैं। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआइ) तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार केंद्र सरकार के अधीन होता है, जबकि पश्चिम बंगाल सरकार ने पहले राज्य सुरक्षा सलाहकार की घोषणा की और अब राज्य सरकार के अंतर्गत डीआरआइ स्थापित करने का फैसला ले रही है। ऐसा कर के ममता बनर्जी संघीय व्यवस्था में राज्य व केंद्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा करना चाहती हैं।