जम्मू-कश्मीर में दिसंबर 2018 से राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। इससे पहले सूबे में 19 जून 2018 से लेकर दिसंबर 2018 के बीच राज्यपाल शासन था। जून से पहले प्रदेश में महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली पीडीपी और भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सरकार थी। 21 नवंबर को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने 87 सदस्यों वाली विधानसभा को भंग कर दिया था। इससे पीडीपी की एनसी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की संभावनाओं पर पानी फिर गया था। 19 दिसंबर को जैसे ही सूबे में राज्यपाल शासन समाप्त हुआ तो राष्ट्रपति शासन लग गया। क्योंकि संविधान में जम्मू-कश्मीर के लिए राज्यपाल शासन को बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। आइए आने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिति के बारे में सबकुछ जानते हैं।
सरकार की स्थिति?
भाजपा- पीडीपी गठबंधन वाली सरकार के बीच खटपट के बाद से सूबे में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है।
लोकसभा सीटें
जम्मू-कश्मीर में लोकसभा की छह सीटें हैं।
लोकसभा सीटों की वर्तमान स्थिति
पीडीपी-1
भाजपा- 2
नेशनल कॉन्फ्रेंस- 1
महबूबा के इस्तीफे के बाद से खाली पड़ी है लद्दाख सीट
लद्दाख से भारतीय जनता पार्टी के सांसद थुप्सन चेवांग ने अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया था। वह लद्दाख के लिए केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा मांग कर रहे थे। अनंतनाग सीट खाली है। यह सीट उस वक्त से खाली है जब महबूबा मुफ्ती ने साल 2016 में सूबे के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के लिए इस सीट से इस्तीफा दे दिया था। हिंसी की वजह से इस सीट पर इसके बाद चुनाव नहीं हो सके।
सूबे में वोटर्स की कुल संख्या: 78,50,671
विधानसभा सीटें- 87
विधानसभी की सीटें किसके पास कितनी?
पीडीपी-28
भाजपा-25
नेशनल कॉन्फ्रेंस- 15
कांग्रेस -12
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस-2
राजनीतिक पार्टियां और नेता
नेशनल कॉन्फ्रेंस
-फारुख अब्दुल्ला
-उमर अब्दुल्ला
पीडीपी
-महबूबा मुफ्ती
कांग्रेस
-गुलाम नबी आजाद
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस
-सज्जाद लोन
भाजपा
-जितेंद्र सिंह