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राम की अयोध्या में किसका होगा राजतिलक और किसे मिलेगा वनवास

Wed, 27 Mar 2019 03:33 PM IST
Amit Digital अमित शर्मा , नई दिल्ली
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लोकसभा चुनाव 2019 (सांकेतिक चित्र) - फोटो : Amar Ujala
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फैजाबाद (अयोध्या) लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद लल्लू सिंह चौथी बार मैदान में हैं। लल्लू सिंह फैजाबाद सीट से भाजपा का पर्याय बन चुके हैं तो इसका कारण यह है कि 1989 से 2007 तक वे लगातार यहां से विधायक चुने गए। 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें पहली बार हार का सामना करना पड़ा। हालांकि मोदी लहर में पहली बार लोकसभा पहुंचने में कामयाब हुए। उन्हें इस बार भी अपनी जीत का पूरा भरोसा है। 

मोदी के नाम और अपने काम पर भरोसा

हिंदुओं की आस्था से जुड़ी अयोध्या की सांस्कृतिक नगरी का इस बार बहुत विकास किया गया है। सरयू नदी के घाटों से लेकर सड़कों का जाल बिछ गया है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले दिनों यहां लगभग सात हजार करोड़ रुपये की अनेक परियोजनाओं की शुरुआत की थी।
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उत्तर प्रदेश (यूपी) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रमुखता में शामिल होने के कारण पिछले दो साल से अयोध्या लगातार देश-दुनिया की सुर्खियों में रहा। उन्होंने कभी दीपावली का आयोजन कर तो कभी सांस्कृतिक पर्यटन के जरिए अयोध्या को सुर्खियों में बनाए रखा। 

अयोध्या की जनता इस बार भाजपा को वोट क्यों देगी, इस सवाल पर लल्लू सिंह ने अमर उजाला को बताया कि अयोध्या पहली बार विकास के कारण पूरी दुनिया में जाना गया है। रामायण सर्किट, अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा में अनेक धार्मिक जगहों का पुनरुद्धार और हाईवे के निर्माण ने इस क्षेत्र के विकास में पंख लगा दिए हैं।
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आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन के जरिए यहां के युवाओं को बेहतर रोजगार मिलने की संभावना को भी वे अपनी जीत की अहम वजह बताते हैं। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हाथ से विकास किया है और दूसरे हाथ से देश की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। यही कारण है कि आज देश का हर युवा उनके साथ जुड़ने में खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। लल्लू सिंह को उम्मीद है कि वे इस बार भी भारी बहुमत से जीत हासिल करने में कामयाब रहेंगे। 

सपा-बसपा गठबंधन उनके सामने कितनी चुनौती पेश कर पाएगा, इस सवाल पर भाजपा सांसद लल्लू सिंह ने कहा कि गठबंधन के प्रत्याशी आनंदसेन यादव के पास पिता मित्रसेन यादव की विरासत के आलावा और कुछ नहीं है। सपा और बसपा कार्यकर्ताओं में आपसी तालमेल भी नहीं है। ऐसे में उन्हें नहीं लगता कि वे उनके सामने कोई चुनौती पेश कर पाएंगे। 

अयोध्या में राममंदिर निर्माण के सवाल पर लल्लू सिंह ने कहा कि यह भाजपा ही नहीं पूरे हिंदू समाज की प्राथमिकता है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि अदालती फैसले से इस मामले का हल निकल जाएगा और अयोध्या हिंदुओं की धार्मिक राजधानी की तरह प्रतिष्ठित हो सकेगी। 
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सपा और भाजपा का रहा है दबदबा

अयोध्या की इस सांस्कृतिक नगरी पर कभी भाजपा तो कभी समाजवादी पार्टी को सफलता मिलती रही है। 2014 में लल्लू सिंह के चुने जाने के पहले इस सीट से 1991, 1996, 1999 में विश्व हिन्दू परिषद के कट्टर हिंदूवादी छवि के नेता रहे विनय कटियार को सफलता हासिल हुई थी। वे अटल-आडवाणी युग की भाजपा में पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं।

मित्रसेन यादव इस सीट पर अकेले ऐसे बड़े नेता रहे जो अलग-अलग दलों में रहने के बाद भी अयोध्या की जनता का दिल जीतने में कामयाब रहे। 1989 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया में रहते हुए उन्होंने जीत हासिल की थी।

इसके बाद 1998 में समाजवादी पार्टी में रहते हुए तो 2004 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर वे जीत हासिल करने में कामयाब रहे। उनकी करिश्माई छवि को देखते हुए ही सपा-बसपा गठबंधन ने उनके देहावसान के बाद उनके बेटे अशोकसेन यादव को 2019 में इस सीट से उतारा है। 

अयोध्या में श्री राम लला के मंदिर का ताला खुलवाने वाली, और हिंदुओं को पूजा का अधिकार दिलाने वाली कांग्रेस इस सीट पर मंडल युग के बाद अपना प्रभाव छोड़ने में नाकाम साबित हुई। 2009 में फैजाबाद से कांग्रेस के डॉक्टर निर्मल खत्री को जीत हासिल हुई थी। वे लंबे समय से फैजाबाद सीट पर कांग्रेस के चेहरे रहे हैं। 
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