फैजाबाद (अयोध्या) लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद लल्लू सिंह चौथी बार मैदान में हैं। लल्लू सिंह फैजाबाद सीट से भाजपा का पर्याय बन चुके हैं तो इसका कारण यह है कि 1989 से 2007 तक वे लगातार यहां से विधायक चुने गए। 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें पहली बार हार का सामना करना पड़ा। हालांकि मोदी लहर में पहली बार लोकसभा पहुंचने में कामयाब हुए। उन्हें इस बार भी अपनी जीत का पूरा भरोसा है।
हिंदुओं की आस्था से जुड़ी अयोध्या की सांस्कृतिक नगरी का इस बार बहुत विकास किया गया है। सरयू नदी के घाटों से लेकर सड़कों का जाल बिछ गया है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले दिनों यहां लगभग सात हजार करोड़ रुपये की अनेक परियोजनाओं की शुरुआत की थी।
उत्तर प्रदेश (यूपी) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रमुखता में शामिल होने के कारण पिछले दो साल से अयोध्या लगातार देश-दुनिया की सुर्खियों में रहा। उन्होंने कभी दीपावली का आयोजन कर तो कभी सांस्कृतिक पर्यटन के जरिए अयोध्या को सुर्खियों में बनाए रखा।
अयोध्या की जनता इस बार भाजपा को वोट क्यों देगी, इस सवाल पर लल्लू सिंह ने अमर उजाला को बताया कि अयोध्या पहली बार विकास के कारण पूरी दुनिया में जाना गया है। रामायण सर्किट, अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा में अनेक धार्मिक जगहों का पुनरुद्धार और हाईवे के निर्माण ने इस क्षेत्र के विकास में पंख लगा दिए हैं।
आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन के जरिए यहां के युवाओं को बेहतर रोजगार मिलने की संभावना को भी वे अपनी जीत की अहम वजह बताते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक हाथ से विकास किया है और दूसरे हाथ से देश की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। यही कारण है कि आज देश का हर युवा उनके साथ जुड़ने में खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। लल्लू सिंह को उम्मीद है कि वे इस बार भी भारी बहुमत से जीत हासिल करने में कामयाब रहेंगे।
सपा-बसपा गठबंधन उनके सामने कितनी चुनौती पेश कर पाएगा, इस सवाल पर भाजपा सांसद लल्लू सिंह ने कहा कि गठबंधन के प्रत्याशी आनंदसेन यादव के पास पिता मित्रसेन यादव की विरासत के आलावा और कुछ नहीं है। सपा और बसपा कार्यकर्ताओं में आपसी तालमेल भी नहीं है। ऐसे में उन्हें नहीं लगता कि वे उनके सामने कोई चुनौती पेश कर पाएंगे।
अयोध्या में राममंदिर निर्माण के सवाल पर लल्लू सिंह ने कहा कि यह भाजपा ही नहीं पूरे हिंदू समाज की प्राथमिकता है। उन्हें पूरी उम्मीद है कि अदालती फैसले से इस मामले का हल निकल जाएगा और अयोध्या हिंदुओं की धार्मिक राजधानी की तरह प्रतिष्ठित हो सकेगी।