लोकसभा चुनाव 2019 में 100 सीटें भाजपा और कांग्रेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहेंगी जहां हार जीत का अंतर 10 प्रतिशत के आसपास रहा है। चुनाव में कांग्रेस की नजर देश की करीब 56 सीटों पर होगी जहां वह 80 हजार या उससे कम वोटों से हारी थी। इनमें से 24 सीटों पर बहुत कड़ा मुकाबला था। लोकसभा चुनाव 2014 के परिणामों से स्पष्ट होता है कि कांग्रेस पार्टी 224 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी जबकि उसे 44 सीटों पर जीत हासिल हुई थी।
लोकसभा चुनाव का प्रचार कार्य तेज होने के साथ कांग्रेस का जोर उधमपुर, खडूर साहब, सहारणपुर, करौली, ढोलपुर, लोहरदगा, रांची, महासमुंद, आणंद, सांवरकांठा, धार, नंदुरबार, दादरा नगर हवेली, दावणगेरे, बेलगांव, कुशीनगर, रायगंज, मांडया, कोप्पल, बेलगाम, सासाराम, लक्षद्वीप, त्रिशूर, बीजापुर, कासरगोड सीट पर बढ़ गया है। इन सीटों पर पिछले चुनाव में कांटे का मुकाबला था।
देशभर में कुल 23 सीटों पर हार-जीत का फैसला मात्र एक प्रतिशत से कम मतों से हुआ था। इसमें सबसे ज्यादा चार सीटें कर्नाटक में, तीन केरल में और दो-दो सीटें आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में जबकि एक-एक सीट जम्मू कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में है। इन 23 सीटों पर जीत हार का अंतर 36 से लेकर 11,178 रहा है।
इन सीटों में से छह-छह सीटें भाजपा और कांग्रेस ने जीतीं, जबकि तीन सीट माकपा, दो सीट बीजू जनता दल और एक-एक सीट राजद, लोजपा, जेडीएस, शिवसेना, तेदेपा एवं टीआरएस को मिली थीं। एक प्रतिशत से कम अंतर वाली इन 23 सीटों में से 17 सीटों पर मतदान का प्रतिशत 70 से अधिक था। इसलिए इन सीटों पर मतदान प्रतिशत बढ़ने की गुंजाइश ज्यादा नहीं है।
पिछले लोकसभा चुनाव में एक प्रतिशत मतों के अंतर से जीतने वाले प्रमुख नेताओं में कांग्रेस नेता एम वीरप्पा मोइली, शिवसेना के अनंत गीते और माकपा के मोहम्मद सलीम के नाम शामिल हैं। 2014 में हार-जीत का सबसे कम अंतर जम्मू कश्मीर की लद्दाख सीट पर था जहां भाजपा मात्र 36 मतों के अंतर से जीती थी।