भोपाल में कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह को चुनावी रण में उतारने के फैसले के बाद भाजपा में उथल-पुथल मची हुई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा, दिग्विजय के खिलाफ मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को खड़ा कर सकती है। पिछले तीन दशकों से भोपाल लोकसभा सीट, भाजपा का गढ़ रहा है, इसलिए इस सीट को बनाए रखने के इरादे से पार्टी ने अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना शुरू कर दिया है।
पिछले साल हुए विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद अब भाजपा अपने हाथ से यह बड़ा मौका गंवाना नहीं चाहती। ऐसे में भोपाल सीट से दिग्विजय के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार उतारने के लिए भाजपा पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम पर विचार कर रही है।
भाजपा इस तथ्य से भी वाकिफ है कि विधानसभा चुनावों में भोपाल लोकसभा सीट के तहत आने वाली सभी 8 विधानसभा सीटों में मिलाकर कांग्रेस और भाजपा के वोटों का अंतर एक लाख से भी कम था। ऐसा 1989 के बाद 2018 में दूसरी बार हुआ।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रख कर भाजपा दिग्विजय के खिलाफ भोपाल के मेयर आलोक शर्मा और भाजपा के प्रदेश महासचिव वीडी शर्मा के नाम पर भी विचार कर रही है, लेकिन लोगों के बीच शिवराज सिंह चौहन को लेकर अलग ही उत्साह देखा जा रहा है।
इस बीच खुद शिवराज सिंह चौहान ने भी दिग्विजय सिंह के भोपाल से उतरने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। शिवराज ने कहा कि दिग्विजय सिंह भोपाल से या कहीं से भी चुनाव लड़ें, भाजपा के सामने चुनौती नहीं बन पाएंगे। भाजपा प्रदेश की सभी 29 में से 29 सीटें जीतेगी।
दिग्विजय सिंह भोपाल से या कहीं से भी चुनाव लड़ें, भाजपा के सामने चुनौती नहीं बन पायेंगे। भाजपा प्रदेश की सभी 29 सीटें जीतेगी। pic.twitter.com/1KW9PxhBRF
— Chowkidar Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) March 24, 2019
बता दें कि इससे पहले 1999 में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी भोपाल से चुनाव लड़ा था और और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी को 1 लाख 68 हजार वोटों से हराया था। इसके चार साल बाद, 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार के रूप में भारती ने दिग्विजय सिंह की कांग्रेस सरकार को सदन में हार का स्वाद चखाते हुए मात्र 38 सीटों पर समेट दिया था। हालांकि इस बार भारती ने पहले ही साफ कर दिया कि वो लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी।
इस समय भोपाल में भाजपा की सबसे बड़ी चिंता 4.5 लाख अल्पसंख्यक मतदाता बने हुए हैं, जिनका फायदा कांग्रेस को मिलने की संभावना है।