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बिहार की जंग: क्या चलेगा मोदी-नीतीश का जादू या चमकेंगे तेजस्वी?

Wed, 10 Apr 2019 09:07 PM IST
Trainee Trainee चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बिहार का संग्राम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
बिहार की राजनीति हमेशा से दिलचस्प और उतार-चढ़ाव भरी रही है और इसका प्रभाव देश की राजनीति पर भी पड़ता है। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए मतदान 11 अप्रैल से शुरू हो रहा है। इस बार एक-एक सीट का महत्व बढ़ गया है। साफतौर पर भाजपा और विपक्ष में कांटे की टक्कर नजर आ रही है। तमाम क्षेत्रीय दल भाजपा के खिलाफ एकजुट नजर आ रहे हैं। बिहार में भी कड़ा मुकाबला होने के आसार दिख रहे हैं। एक तरफ भाजपा-जदयू तो दूसरी तरफ राजद-कांग्रेस व अन्य दल गठजोड़ बनाकर चुनावी मैदान में उतरे हैं। लोकसभा चुनाव में दोनों गठबंधन एक-दूसरे को टक्कर देने के लिए तैयार बैठे हैं। सवाल है कि क्या इस बार यहां मोदी-नीतीश का जादू चलेगा या तेजस्वी यादव सियासत के आकाश में चमकेंगे। आइए जानते हैं बिहार में किस तरह की सियासी तस्वीर उभर रही है और कौन सा गठबंधन यहां भारी पड़ सकता है। 

 
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मोदी-नीतीश
एनडीए में सीट बंटवारा 

बिहार में कुल 40 लोकसभा सीटें हैं। इस बार यहां की सियासी तस्वीर बता रही है कि 2019 की चुनावी जंग अब तक की सबसे बड़ी जंग होगी। एक तरफ भाजपा, नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइडेट (जदयू) और रामविलास पासवान की लोकतांत्रिक जनता पार्टी (लोजपा) है, तो दूसरी तरफ लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और अन्य छोटे दल हैं। आपको दोनों गठबंधन की सीटों का गणित बताते हैं। एनडीए के फॉर्मूले के तरह भाजपा और जदयू 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। लोजपा को छह सीटें दी गई हैं। 2014 चुनाव में भाजपा ने 22 सीटों पर कब्जा जमाया था, वहीं जदयू को मात्र दो सीटें मिली थीं। 2009 में दोनों पार्टियों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और 40 में से 31 सीटें जीती थीं। 
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Mahagathbandhan
महागठबंधन का गणित 

एनडीए से मुकाबले के लिए इस बार विपक्षी दलों का महागठबंधन आकार ले चुका है। राजद की अगुवाई में बने महागठबंधन में कुल पांच पार्टियां शामिल हैं। ये हैं- राजद, कांग्रेस, जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और विकासशील इंसान पार्टी। कुल 40 सीटों में से राजद सबसे ज्यादा 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, उसके कोटे से सीपीआई माले को एक सीट दी जाएगी। कांग्रेस को 9, रालोसपा को पांच, हम और वीआईपी को तीन-तीन सीटें दी गई हैं।  
 

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पीएम मोदी - फोटो : संजय गुप्ता
2014 लोकसभा के नतीजे

2014 लोकसभा चुनाव मेें बिहार में जबरदस्त मोदी लहर थी। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा था। भाजपा ने 40 में से 22 सीटों पर कब्जा जमाया था। लोजपा को छह और रालोसपा को तीन सीटें मिली थीं। राजद को चार, जदयू-कांग्रेस को दो-दो और एनसीपी को एक सीट मिली थी। भाजपा को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र के बाद बिहार में सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं। लोकसभा चुनाव में मिली बुरी हार का ही नतीजा था कि 2015 विधानसभा चुनाव में राजद-जदयू को मिलकर चुनाव लड़ना पड़ा।

 
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बिहार चुनाव
2015 विधानसभा चुनाव के नतीजे

243 सीटों वाले बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू, आरजेडी और कांग्रेस ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। जदयू को 71, आरजेडी को 80 और कांग्रेस को 27 सीटों पर जीत मिली थी। भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों ने 58 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन नतीजों ने उन सभी अनुमानों और सर्वे को ध्वस्त कर दिया था जो बता रहे थे कि यहां एनडीए की सरकार बन सकती है। लालू का पुराना जलवा नजर आया और राजद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। 
 
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पीएम मोदी, नीतीश कुमार और लालू यादव
महत्वपूर्ण चेहरे

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक लोकप्रिय चेहरा हैं और इन्हें लोग सुशासन बाबू के नाम से जानते हैं। हालांकि नीतीश कुमार पर विपक्ष कानून व्यवस्था नहीं संभाल पाने का आरोप लगाती रही है। सुशील कुमार मोदी (भाजपा), लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव (आरजेडी), रामविलास पासवान( लोजपा), मदन मोहन झा (कांग्रेस), उपेंद्र कुशवाहा (रालोसपा) और जीतन राम मांझी (हम) अपने-अपने पार्टी और राज्य के मशहूर राजनीतिक चेहरे हैं।
 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान - फोटो : अमर उजाला
इसबार के चुनावी मुद्दे

17वीं लोकसभा चुनाव में विकास, कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा, बिजली, रोजगार और किसान जैसे मुद्दे हावी हैं। कानून व्यवस्था और रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा होगा। हाल के दिनों में बिहार में कई पत्रकारों पर हमले हुए जिसमें राजदेव रंजन भी शामिल हैं। इसके अलावा होम शेल्टर में नाबालिग के साथ बलात्कार की घटना के बाद नीतीश सरकार सवालों के घेरे में है। बिहार में सात चरणों में मतदान होगा। 11, 18, 23, 29 अप्रैल और 6, 12, 19 मई को यहां वोटिंग होगी। 23 मई को साफ होगा कि बिहार की जनता ने किस पार्टी पर अपना भरोसा जताया है। 
 
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