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पश्चिम बंगाल की नौ सीटों पर आज वोटिंग, बवाल आखिर किसको पड़ेगा भारी

Sun, 19 May 2019 05:58 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
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मतदान (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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पश्चिम बंगाल में सातवें और आखिरी चरण के चुनाव में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस और उसे चुनौती देने वाली भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा और ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने के लिए दोनों दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। जिन नौ सीटों पर मतदान होना है, वे कोलकाता और उसके आस-पास हैं। इन सीटों के नतीजों से साबित होगा कि शहरी मतदाताओं पर तृणमूल की पकड़ पहले जैसी है या भाजपा को इसमें सेंध लगाने में कामयाबी मिली है।

हिंसा और ईश्वरचंद्र की मूर्ति तोड़े जाने का आखिरी चरण में दिखेगा असर

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ममता की सीट पर अभिनेत्री मिमी 
ममता बनर्जी ने वर्ष 1984 में इसी सीट से माकपा के सोमनाथ चटर्जी को हराकर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा था। इस बार ममता ने यहां से बांग्ला फिल्मों की शीर्ष अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती को उतारा है। वे सियासत में एकदम नई हैं। वर्ष 2014 में तृणमूल के डॉ. सुगत बोस ने माकपा के सुजन चक्रवर्ती को सवा लाख वोटों से हराकर यह सीट जीती थी। मिमी का मुकाबला माकपा के वरिष्ठ नेता विकास रंजन भट्टाचार्य से है। भाजपा ने डॉ. अनुपम हाजरा को उतारा है। हाजरा बीरभूम से तृणमूल से जीत चुके हैं। इस बार भाजपा के साथ हैं।
प्रमुख मुद्दे : नागरिक और स्वास्थ्य सुविधाएं।

सुदीप व राहुल में कड़ी टक्कर
हिंदीभाषी मतदाताओं की बहुलता वाली सीट पर वर्ष 2014 में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष व भाजपा उम्मीदवार राहुल सिन्हा लगभग ढाई लाख वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे। वर्ष 2009 के मुकाबले उन्हें 25.88 फीसदी ज्यादा वोट मिले थे। इसके बावजूद तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार सुदीप बंद्योपाध्याय ने उन्हें करीब 96 हजार वोटों के अंतर से पराजित कर दिया था। यह दोनों अबकी भी मैदान में हैं। उनके अलावा कांग्रेस के सैयद शहीद इमाम और माकपा की कनीनिका बोस भी अपनी किस्मत आजमा रही हैं।
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मुद्दे : विकास, सड़कें, स्वास्थ्य सुविधाएं, पीने के पानी की सप्लाई।

नेताजी के पड़पोते पर टिकी नजर
वर्ष 2009 में ममता बनर्जी यहां जीतकर रेल मंत्री बनी थीं। सरकार से समर्थन वापस लेने व 2011 के विधानसभा चुनावों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। उपचुनाव में सुब्रत बख्शी जीते थे। बख्शी ने 2014 में सीट बरकरार रखी। तब भाजपा को 21.33% ज्यादा वोट मिले तो तृणमूल के वोटों में 20.24% की कमी आई थी। तृणमूल से माला राय तो भाजपा से नेताजी के पड़पोते चंद्र कुमार बोस उम्मीदवार हैं। माकपा से नंदिनी मुखर्जी व कांग्रेस से मीता चक्रवर्ती मैदान में हैं। 
प्रमुख मुद्दे : स्वास्थ्य व नागरिक सुविधाएं।

हैट्रिक की कोशिश में सौगत 
यूपीए सरकार में राज्यमंत्री रहे तृणमूल कांग्रेस नेता सौगत राय ने वर्ष 2009 में माकपा के अमिताभ नंदी और वर्ष 2014 में माकपा के ही असीम कुमार दासगुप्ता को हराकर जीत दर्ज की थी। सौगत इस बार भी तृणमूल के टिकट पर हैट्रिक की तैयारी में हैं। सीपीएम ने नेपालदेब भट्टाचार्य को तो भाजपा ने शमीक भट्टाचार्य को उतारा है। कांग्रेस ने सौरव साहा को अपना उम्मीदवार बनाया है। यहां शिवसेना ने भी इंद्रनील बनर्जी के रूप में अपना उम्मीदवार उतारा है।
प्रमुख मुद्दे : रोजगार, विकास और नागरिक सुविधाएं।

नुसरत के सामने सायंतन 
बांग्लादेश सीमा से लगी यह सीट तीन दशक तक भाकपा का गढ़ रही। वर्ष 2009 में तृणमूल के शेख नुरूल इस्ताम ने भाकपा के अजय चक्रवर्ती को हराया था। तब भाजपा के स्वपन कुमार दास को 6.51% वोट मिले थे। 2014 में तृणमूल के इदरीस की जीत का अंतर 1.10 लाख पहुंच गया। भाजपा का वोट बढ़कर 18.36% हो गया। अबकी तृणमूल की नुसरत जहां के अलावा भाकपा के पल्लब सेनगुप्ता, भाजपा के सायंतन बसु और कांग्रेस के काजी अब्दुर रहमान मैदान में हैं। यहां 77% हिंदू व 22% मुस्लिम हैं।
प्रमुख मुद्दे : सीमा पार से घुसपैठ, रोजगार।

रोचक मुकाबले में फंसी सीट
दक्षिण 24 परगना जिले की यह सीट वामदलों का गढ़ है। 2014 में तृणमूल की प्रतिमा मंडल ने पहली बार यहां जीत हासिल की थी। इस बार भी तृणमूल ने उन्हें ही मैदान में उतारा है। इस सीट पर रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) का दबदबा रहा है। इस बार आरएसपी से सुभाष नस्कर उम्मीदवार हैं। इसके साथ ही सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (एसयूसीआई) ने जय कृष्णा हालदार को टिकट दिया है। भाजपा ने अशोक कंदारी को चुनाव मैदान में उतारा है।
प्रमुख मुद्दे : रोजगार, बुनियादी सुविधाएं।

ममता की साख दांव पर
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के मैदान में होने की वजह से इस सीट की अहमियत काफी बढ़ गई है। कभी वामपंथियों का गढ़ रही इस सीट पर अभिषेक वर्ष 2014 में यहां से जीत कर सांसद बने। उस समय भाजपा तीसरे स्थान पर रही थी। अबकी अभिषेक के मुकाबले भाजपा ने नीलांजन राय को मैदान में उतारा है। कांग्रेस से सौम्या आइच राय मैदान में हैं, तो माकपा से डॉ. फवाद आलम। 
प्रमुख मुद्दे : कुल्पी में प्रस्तावित बंदरगाह और गंगा सागार द्वीप तक जाने के लिए नदी पर ब्रिज का निर्माण।

मथुरापुर : तीसरी जीत के लिए जुटे जटुआ
दक्षिण 24-परगना जिले की इस सीट पर 2009 व 2014 में तृणमूल के चौधरी मोहन जटुआ ने कब्जा किया था। वे हैट्रिक के लिए उतरे हैं। भाजपा ने श्याम प्रसाद हाल्दार, माकपा ने शरत चंद्र हाल्दार और कांग्रेस ने कृत्तिवास सरदार को उतारा है। यहां 1989 से 1999 तक माकपा के राधिका रंजन प्रामाणित 5 बार जीते।
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प्रमुख मुद्दे : सड़क, स्वास्थ्य बुनियादी सुविधाएं औऱ जलवायु परिवर्तन के कारण सुंदरबन के द्वीपों पर होने वाला बदलाव और उसे निपटने की चुनौती।

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