19 मई को बिहार की आठ संसदीय सीटों के लिए वोट पड़ेंगे। ये सीटें न केवल दोनों गठबंधनों का भविष्य तय करेंगी, बल्कि यहां मोदी सरकार के 4 मंत्रियों की किस्मत की भी अग्निपरीक्षा है। इन सीटों के लिए 159 उम्मीदवार मैदान में हैं।
पटना साहिब : शत्रुघ्न और रविशंकर में जीत की जंग
शत्रुघ्न सिन्हा इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार हैं तो भाजपा ने इस बार अपने दिग्गज नेता और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को चुनावी मैदान में उतारा है। रविशंकर और शत्रुघ्न का पहला आपसी मुकाबला है। बिहारी बाबू सिन्हा भाजपा के टिकट पर दो बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं और इस बार हैट्रिक लगाने के लिए उतरे हैं। इस संसदीय क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। बख्तियारपुर, दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार, पटना साहिब और फतुहा शामिल हैं। वर्तमान में यहां भाजपा का वर्चस्व है। स्थानीय मुद्दों में बेरोजगारी, ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, जल जमाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्त्रिस्केट स्टेडियम यहां के प्रमुख मुद्दे हैं।
पाटलिपुत्र : लालू की बेटी और उनके पुराने सहयोगी में टक्कर
यहां से राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती लोकसभा का चुनाव लड़ रही हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के रामकृपाल यादव ने मीसा भारती को लगभग 40 हजार वोटों से हराया था। रामकृपाल लालू प्रसाद यादव के खास सहयोगी रह चुके हैं और पिछले चुनाव में वे भाजपा के साथ चले गए थे। मीसा के लिए राहत की बात यह है कि पिछले चुनाव में 51 हजार से ज्यादा वोट हासिल करने वाले माले ने इस बार अपना उम्मीदवार नहीं उतारकर मीसा को समर्थन का एलान कर दिया है। बेरोजगारी, बढ़ता अपराध, बिहटा-औरंगाबाद रेलखंड का निर्माण, गंगा पर स्थाई पुल, और सिंचाई की समस्या यहां के प्रमुख मुद्दे हैं।
सासाराम : मीरा कुमार और छेदी पासवान फिर आमने-सामने
इस सीट से पूर्व उपप्रधानमंत्री जगजीवन राम 8 बार सांसद रहे। आरक्षित सासाराम से एक बार फिर बाबू जगजीवन राम की बेटी कांग्रेस की मीरा कुमार और भाजपा के छेदी पासवान आमने-सामने हैं। लोकसभा स्पीकर रहीं मीरा को 2014 में छेदी ने ही हराया था। यहां दुर्गावती जलाशय परियोजना का शिलान्यास तत्कालीन कैबिनेट मंत्री जगजीवन राम ने 1976 में किया था। 2014 में वह परियोजना पूर्ण कराकर तत्कालीन सीएम जीतनराम मांझी ने उद्घाटन किया, हालांकि नहरों का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है।
बक्सर : पारंपरिक ध्रुवीकरण की सीट पर फिर भिड़े पुराने योद्धा
यहां से केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे और आरजेडी के दिग्गज नेता जगदानंद सिंह आमने-सामने हैं। इस सीट पर यादव और गैर-यादव वोटरों के बीच ध्रुवीकरण की राजनीति होती रही है। ब्राह्मण बहुल इलाके में भाजपा के अश्विनी कुमार चौबे की राह पिछली बार ददन यादव ने आसान बना दी थी। राजद के जगदानंद सिंह 1,32,338 मतों से परास्त हुए थे, जबकि बसपा उम्मीदवार ददन यादव 1,84,788 मत झटक ले गए। इस बार ददन मैदान में नहीं और वह भाजपा के लिए प्रचार कर रहे।
नालंदा : नीतीश के गढ़ में फिर हम और जदयू में मुकाबला
यह सीट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गढ़ है, यहां 2014 में भी मोदी लहर का असर नहीं था। इस बार मुख्य मुकाबला वर्तमान जदयू सांसद कौशलेंद्र कुमार और मांझी की पार्टी हम के अशोक चंद्रवंशी से है। यहां सात विधानसभा क्षेत्र में से पांच पर जदयू, एक-एक पर भाजपा और राजद का कब्जा है।
आरा : भाजपा के सिंह के सामने माले के राजू ने खड़ी की चुनौती
पूर्व गृह सचिव व मौजूदा केंद्रीय मंत्री आरके सिंह एक बार फिर यहां भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। दूसरी तरफ राजद के समर्थन से माले उम्मीदवार राजू यादव 2014 की हार का बदला लेने के लिए फिर से चुनावी मैदान में हैं। यहां बेरोजगारी, अपराध पर लगाम, शाहाबाद को प्रमंडल की मांग, और शहर में ट्रैफिक अव्यवस्था प्रमुख मुद्दे हैं।
काराकाट : राजग छोड़ने वाले उपेंद्र से भिड़े जदयू के महाबली
वर्ष 2014 में राजग के घटक दल के तौर पर रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा यहां से चुनाव जीते थे। इस बार कुशवाहा विपक्षी महागठबंधन के घटक दल के तौर पर बिहार की दो लोकसभा सीटों काराकाट और उजियारपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। पिछली बार उपेंद्र से हारने वाले जदयू के महाबली सिंह बदला लेने के लिए फिर से मैदान में हैं। पिछली बार 3,38,892 मत पाकर कुशवाहा विजयी रहे थे। राजद की कांति मात खा गई थीं। महाबली जदयू के उम्मीदवार थे।
जहानाबाद : त्रिकोणीय मुकाबले का सामना कर रहे अरुण कुमार
पिछली बार रालोसपा से चुनाव जीते अरुण कुमार रालोसपा (सेकुलर) के बैनर तले फिर से मैदान में हैं। वहीं 2014 की हार का बदला लेने राजद के सुरेंद्र यादव फिर उतरे हैं। जदयू से चंदेशवर चंद्रवंशी चुनाव लड़ रहे हैं। क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर राजद का वर्चस्व है। यहां पर्यटक स्थल वाणावर में रोप-वे और हुलासगंज में इंजीनियरिंग कॉलेज की स्वीकृति मिली है। सड़क, बिजली की स्थिति बेहतर हुई है। बेरोजगारी, शिक्षा, अपराध पर लगाम, सिंचाई के इंतजाम और कुटीर औद्योगिक विकास यहां के प्रमुख मुद्दे हैं।