चुनाव बाद उत्पन्न होने वाली राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर पार्टियां बेहद सतर्क हैं। पार्टी की लाइन और उसके प्रवक्ताओं, टीवी पैनेलिस्टों के बयानों में कोई विरोधाभास न हो या कोई नया विवाद न उपजे, इसके लिए राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। कांग्रेस अपने प्रवक्ताओं और टीवी पैनेलिस्टों के लिए सोमवार और मंगलवार को कार्यशाला का आयोजन कर रही हैं, वहीं भाजपा और आम आदमी पार्टी भी ऐसी तैयारियां कर रही हैं। इन कार्यशालाओं में उनके प्रवक्ताओं को बताया जाएगा कि नतीजे आने के बाद उन्हें किस परिस्थिति में क्या बोलना है।
कांग्रेस प्रवक्ताओं को पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल और वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी प्रशिक्षण देंगे। साथ ही कुछ जनसंपर्क विशेषज्ञों को भी बुलाया जा रहा है जिससे कि पार्टी की मीडिया रणनीति बेहतर बनाई जा सके। आप की वर्कशॉप को पार्टी अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया संबोधित करेंगे तो, 22 मई को भाजपा के प्रवक्ताओं से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली बात करेंगे।
परिणाम के तर्क समझाएंगेः इन दो दिनों के दौरान प्रवक्ताओं को बताया जाएगा कि यदि उनकी पार्टी के नतीजे अपेक्षा के अनुरूप नहीं आए तो, उन्हें इसके पीछे के क्या कारण बताने हैं। या फिर परिणाम अपेक्षा से बेहतर आने की वजह क्या-क्या हो सकती है। इसमें अपनी खूबियोंे और विपक्ष की कमजोरियों पर फोकस रखना बताया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि परिणाम आने के बाद टीवी एंकर, रिपोर्टर या विपक्षी नेता उनसे किस तरह के सवाल पूछ सकते हैं, और इन पर उनकी क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए।
अंतिम नतीजे आने में छह घंटे तक विलंब संभव
चूंकि इस बार हर विधानसभा चुनाव क्षेत्र में पांच मतदान केंद्रों पर वीवीपैट की पर्चियों का ईवीएम में पड़े मतों से मिलान किया जाएगा। किसी लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं तो किसी किसी में नौ-दस भी। इस तरह हर लोकसभा क्षेत्र में 25 से पचास मतदान केंद्रों की वीवीपैट मशीनों का ईवीएम से मिलान किया जाएगा। ईवीएम और वीवीपैट के मिलान की वजह से चुनाव आयोग के अनुमान के अनुसार परिणाम आने में कम से कम छह घंटों की देरी होगी। जबकि राजनीतिक दलों का मानना है कि यह देरी आठ से दस घंटों की हो सकती है। पूरे परिणाम तो 24 मई को ही मालूम हो पाएंगे। इससे विपक्षी दलों को गठबंधन बनाने में मुश्किल आएगी।
इसी वजह से कांग्रेस पार्टी ने प्रोफेशनल ट्रेंड एनालिस्टों की सहायता लेने का फैसला किया है। ये लोग चुनाव आयोग द्वारा हर राउंड के बाद जारी आंकड़ों का विश्लेषण कर पार्टी को बताएंगे कि किस सीट पर किसका उम्मीदवार जीतने की संभावना है, और किस दल को कितनी सीटें मिलने वाली हैं।