बिहार में लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान को यूं ही मौसम विज्ञानी नहीं कहा जाता है। इसे संयोग कहा जाए या सियासी समीकरण, लेकिन उनके बारे में एक डायलॉग बेहदद प्रचलित है कि वह जिस ओर होते हैं, सियासी हवा उसी ओर चलती है। बिहार में जो अबतक रुझान सामने आए हैं, वह इसी बात की ओर संकेत कर रहे हैं कि यहां एक बार फिर भाजपानीत एनडीए ने शानदार प्रदर्शन किया है। वहीं, एनडीए की इस सुनामी में महागठबंधन सिमटता दिख रहा है।
सियासी गलियारों में यह बात आम है कि लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान चुनाव के वक्त जिस तरफ झुकते हैं, उधर की सियासी फिजा बदल रही होती है। अतीत में पासवान कई बार इस तरह के संकेत देकर अपना पाला बदल चुके हैं। कभी एनडीए तो कभी यूपीए और फिर एनडीए, उनका ठिकाना बदलता रहता है। पासवान का सियासी मिजाज अक्सर तय कर देता है कि हवा किस ओर बह रही है। सियासी गलियारों में उन्हें राजनीति का मौसम विज्ञानी भी कहा जाता है।
chirag paswan with Ram Vilas
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हर सरकार में मिली मंत्री पद की 'मलाई'
रामविलास का इतिहास बड़ा ही दिलचस्प रहा है। विरोधी भले ही उन्हें 'बिन पेंदी का लोटा' और 'थाली का बैगन' कहते रहे हों, 2014 से पहले जब यूपीए की सरकार थी, तब भी रामविलास मंत्री थे। 2014 में मोदी सरकार आई, तब भी वह केंद्रीय मंत्री बनाए गए। 2014 आम चुनाव से पहले रामविलास भाजपा के साथ आने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन उनके बेटे चिराग पासवान ने 'मोदी लहर' को भांप लिया और पिता को यूपीए छोड़कर एनडीए के साथ जाने की सलाह दी। चिराग की उस पहल का ही फलाफल है कि आज पासवान केंद्र में मंत्री हैं और कांग्रेस सत्ता से बाहर।
चिराग पासवान
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रुझानों से उत्साहित चिराग ने जताया आभार
बिहार की जमुई लोकसभा सीट से आगे चल रहे रामविलास के बेटे चिराग पासवान उत्साहित दिखे। मतगणना शुरू होने के कुछ घंटे बाद पहली प्रतिक्रिया देेते हुए उन्होंने खुशी जताई। कहा कि उन्हें जनता का प्यार और समर्थन मिल रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उनका और उनकी पार्टी का समर्पण है। उन्होंने कहा कि 2019 के चुनाव में जमुई की जनता का समर्थन मिलना पिछले पांच सालों में जो विकास कार्य किए गए, उसका फल है। पासवान ने कहा कि पिछले कार्यकाल में एनडीए सरकार ने क्षेत्र ने जितने काम किए हैं, यह रुझान उसी का नतीजा हैं।