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Lok Sabha Election Results 2019: 15 सालों में कितनी बदली राहुल की राजनीति, यह आए बदलाव

Thu, 23 May 2019 06:00 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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15 सालों में बदल गई राहुल की राजनीति - फोटो : Instagram
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2019 लोकसभा के नतीजे सामने आ चुके हैं। जिसमें साफ दिखाई दे रहा है कि कैसे मोदी की सुनामी ने कांग्रेस को हरा दिया है। पिछले साल तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में मिली जीत के बाद यह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल के राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी हार है। कांग्रेस पार्टी जिसे साल 2014 के लोकसभा चुनाव में 44 सीटें मिली थीं। वह इस साल बढ़कर केवल 50 के आंकड़े तक पहुंच पाई है। पिछले 15 सालों में राहुल गांधी ने खुद को दो बार पुनर्स्थापित किया। बेशक उन्हें हार मिली लेकिन अपने हालिया अवतार में राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ पुरजोर तरीके से लड़ाई लड़ी थी।
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आज हम आपको बताते हैं राहुल गांधी ने 15 सालों में कांग्रेस पार्टी में तीन पदों पर रहते हुए क्या मुख्य कार्य किए:- 

राहुल गांधी- महासचिव- मार्च 2004-2015

15 साल पहले राहुल गांधी ने मार्च 2004 में अमेठी लोकसभा सीट से जीत दर्ज करके राजनीति में प्रवेश किया था। सितंबर 2004 में उन्हें कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने राजनीति का ककहरा सीखा। 11 साल तक उन्होंने इस जिम्मेदारी को संभाला। इस दौरान वह अपने भाषणों के दौरान एंग्री यंग मैन के तौर पर नजर आते थे।

उन्हें मई 2011 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने भट्टा परसौल गांव में गिरफ्तार किया था क्योंकि वह किसानों की जमीन अधिग्रहण के लिए ज्यादा मुआवजा देने की मांग का समर्थन कर रहे थे। इसके बाद फरवरी 2012 में एक चुनावी रैली के दौरान उन्होंने एक कागज के टुकड़े को फाड़ दिया था ताकि यह संदेश दिया जा सके कि सपा और बसपा द्वारा किए गए वादे बेकार हैं। एक बार उन्होंने अपनी ही सरकार की आलोचना की थी।
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उपाध्यक्ष- अप्रैल 2015 से नवंबर 2017

पार्टी को 2014 के चुनाव और दिल्ली के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद वह छुट्टियां मनाने के लिए अज्ञात स्थान पर चले गए थे। वापस आकर उनकी एंग्री यंग मैन की छवि खत्म हो चुकी थी और अब वह एक हाजिरजबाव शख्स बन चुके थे। उन्होंने मोदी सरकार के एक साल पूरे होने पर कहा था- जन्मदिन मुबारक हो सूट बूट की सरकार। 

कुल मिलाकर इस समयावधि के दौरान वह लोगों के दिलों को छूने वाली और उन्हें समझ आने वाली बातें करने लगे थे। वह विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों के साथ नजर आने लगे। उन्होंने @OfficeOfRG नाम से अपना ट्विटर हैंडल बनाया और इसके जरिए सरकार पर तंज कसने लगे। इस दौरान पार्टी असम, केरल और उत्तराखंड में हार गई लेकिन उसे बिहार में जीत मिली वो भी महागठबंधन के कारण। पंजाब में उन्हें जीत मिली और पार्टी ने अपनी सरकार बनाई। गोवा और मणिपुर में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस सरकार बनाने में नाकाम रही। इस हार के कारण राहुल के एक बार फिर खुद को पुनर्स्थापित किया।
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कांग्रेस अध्यक्ष- दिसंबर 2017

गुजरात विधानसभा के दौरान राहुल गांधी में बदलाव आया। अब वह पहले के मुकाबले काफी बोल्ड और आक्रामक बन गए। अब वह आरोप लगाने से हिचकते नहीं थे। अब वह धर्म और आस्था को लेकर खुलकर बात करने लगे। पहली बार उन्होंने राफेल सौदे को लेकर मोदी और शाह को उनके गृह राज्य गुजरात में घेरा। नोटबंदी की आलोचना करते हुए उन्होंने जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स का नाम दिया जो लोगों की जुबान पर चढ़ गया। 

उन्होंने नर्म हिंदुत्व कार्ड खेलना शुरू कर दिया। राहुल गांधी अब मंदिर जाने लगे। जिसका उन्हें गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान फायदा भी मिला। सितंबर 2018 में राहुल मानसरोवर की यात्रा पर गए। उन्होंने कर्जमाफी की रणनीति को अपनाया। जिसकी वजह से कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पार्टी सरकार बनाने में कामयाब रही। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने चौकीदार चोर है के नारे लगाए और जनता से लगवाए। मगर वह इन्हें वोटों में तब्दील करने में नाकामयाब रहे। इस कड़ी हार के बाद वह तीसरी बार खुद को तीसरी बार स्थापित करने की कोशिश में जुट जाएंगे। 

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