लोकसभा चुनावों में महज कुछ महीने का समय शेष रह जाने के चलते सभी राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। चुनावी बयानबाजी के जरिए तो मतदाताओं को लुभाने के प्रयास चल ही रहे हैं, अब आम जन के फोन तक भी यह चुनावी दंगल पहुंच गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने आगामी चुनावों में जनता का रुख जानने के लिए फोन पर सर्वेक्षण शुरू कराया है। इसके लिए देश भर में कई स्थानों पर आम नागरिकों को फोन मिलाकर आगामी चुनाव से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में मोबाइल नंबर 7971064167 के जरिए सर्वेक्षण किया जा रहा है, जबकि यूपी के कानपुर, फैजाबाद, उत्तराखंड में हल्द्वानी, पंजाब-हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला शहर समेत अन्य स्थानों पर अलग-अलग मोबाइल नंबरों के जरिए सर्वेक्षण से जुड़े सवाल पूछे गए हैं।
चुनाव आयोग का कहना है कि आचार संहिता लागू होने से पहले ऐसे सर्वेक्षण कराने पर कोई रोक नहीं है। हालांकि आयोग ने यह भी कहा कि मतदान देश के नागरिकों का गोपनीय अधिकार है। ऐसे में सर्वेक्षण के दौरान यह सवाल करना कि वोट किस दल को देंगे, किसी भी तरह से उचित नहीं है।
चुनावी मुद्दों पर काम करने वाली संस्था एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स राष्ट्रीय समन्वयक एवं प्रमुख सेवानिवृत्त मेजर जनरल अनिल वर्मा ने भी कहा कि सर्वे में मतदान किसे करेंगे, यह सवाल किया जाना जायज नहीं है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सभी के पास मोबाइल हैं। ऐसे में जो सजग मतदाता नहीं हैं, उन्हें यह बताने की जरूरत है कि मतदान गोपनीय होता है।