शशि थरूर- के. राजशेखरन
मिजोरम के राज्यपाल के. राजशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। के. राजशेखरन को मई 2018 में मिजोरम का राज्यपाल बनाया गया था। असम के राज्यपाल जगदीश मुखी मिजोरम के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। के. राजशेखरन के इस्तीफे के बाद कहा जा रहा है कि वह कांग्रेस नेता शशि थरूर के खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं।
बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की केरल इकाई राजशेखरन को तिरुवनंतपुरम से शशि थरूर के खिलाफ उम्मीदवार बनाना चाहती है। इसके लिए भाजपा की केरल इकाई ने पार्टी लीडरशिप से बातचीत भी की थी। इस बातचीत के बाद ही राजशेखरन का इस्तीफा आया । ऐसे में कहा जा रहा है कि पार्टी उन्हें कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर के खिलाफ तिरुवनंतपुरम सीट से लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बना सकती है।
वहीं, शशि थरूर का कहना है कि मिजोरम के पूर्व राज्यपाल के. राजशेखरन और उनके बीच रिश्तों में कोई कड़वाहट नहीं है। उन्होंने राजशेखरन को अच्छा इंसान बताया है। थरूर का कहना है कि तिरुवंनतपुर लोकसभा सीट से अगर वह मेरे खिलाफ लड़ते हैं तो यह व्यक्तिगत लड़ाई नहीं बल्कि दो पार्टियों के बीच की लड़ाई है।
संघ प्रचारक रह चुके हैं के. राजशेखरन
के. राजशेखरन संघ विचारधारा से आते हैं। वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रहे हैं। 2015 में उन्हें केरल का भाजपा अध्यक्ष बनाया गया था। वह तीन सालों तक केरल के भाजपा अध्यक्ष रहे और इसके बाद उन्हें मिजोरम का राज्यपाल नियुक्त किया गया। यह भी कहा जा रहा है कि संघ राजशेखरन को फिर से केरल में वापस बुलाना चाहता था। दो हफ्ते पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सामने राजशेखरन को केरल वापस भुलाने का मुद्दा उठाया गया था। अमित शाह के सामने संघ के प्रतिनिधियों ने राजशेखरन को वापस सूबे में बुलाने की मांग की थी।
यह भी कहा जा रहा है कि अगर भारतीय जनता पार्टी के.राजशेखरन को वापस सक्रिय राजनीति में बुलाती है तो दूसरे राज्यों के राज्यपाल भी इस तरह की मांग कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला भी वापस सक्रिय राजनीति में लौटना चाहते हैं। उन्होंने भी ऐसी इच्छा जताई है।