भले ही सभी एग्जिट पोल्स में भाजपा और राजग को अपने दम पर पूर्ण बहुमत का अनुमान व्यक्त किया गया है, मगर पार्टी किसी भी तरह की स्थिति से निपटने की तैयारियों में जुट गई है। इस क्रम में पार्टी के नेता बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस और टीआरएस नेताओं के लगातार संपर्क में हैं। इस बीच, राजग में एकजुटता का संदेश देने के लिए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार को सभी सहयोगी दलों के नेताओं को डिनर पर आमंत्रित किया है। डिनर में खुद पीएम नरेंद्र मोदी भी शिरकत करेंगे। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बहुमत की पूर्ण संभावनाओं के बावजूद हम कांग्रेस को विपक्ष को एकजुट करने का बड़ा मौका नहीं देना चाहते।
पार्टी नेतृत्व चाहता है कि नतीजे के बाद राजग की बढ़त के साथ यह भी दिखे कि राजग के इतर कई विपक्षी दल भी हमारा समर्थन करने के लिए तैयार हैं। इसी उद्देश्य से पार्टी पहले भी आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के मुखिया जगनमोहन रेड्डी, तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव और ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक के संपर्क में थी इनसे संवाद का यह सिलसिला आज भी जारी है। इसके अलावा रणनीति यह भी है कि अगर मतगणना में राजग बहुमत से तनिक भी चूकी तो इसकी भरपाई के लिए बाद में हाथ-पांव मारने के बजाय पहले से ही इसकी पूरी तैयारी रखी जाए।
वाईएसआर, बीजद और टीआरएस पर निगाह
भाजपा भावी सरकार में नौ मौजूदा दलों के अलावा नए दलों को भी शामिल करने के मूड में है। वाईएसआर कांग्रेस, बीजद और टीआरएस माने तो, इन्हें कैबिनेट में जगह मिलेगी। इनके राज्यों में विधानसभा चुनाव पांच साल बाद होंगे, ऐसे में पार्टी के सामने अभी संगठन विस्तार की जरूरत नहीं है।
बीजद ने कहा- जो ओडिशा के मुद्दे सुलझाएगा, उसे देंगे समर्थन
भुवनेश्वर। ओडिशा की सत्तारूढ़ बीजद ने एनडीए सरकार बनने पर उसमें शामिल होने के संकेत दिए हैं। बीजद प्रवक्ता अमर पटनायक ने कहा, हम नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। जो दल सरकार बनने के बाद ओडिशा के अनसुलझे और अरसे से लंबित मुद्दों को सुलझाने का प्रयास करेगा, हमारा समर्थन उसी को जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि नतीजों के बाद बीजद एनडीए से जुड़ सकती है। पिछले दिनों आेडिशा दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फेनी तूफान से निपटने को लेकर पटनायक की तारीफ की थी। वहीं, उन्होंने फोन न उठाने का जिक्र कर बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पर निशाना भी साधा था।
दो नए मंत्रालयों का गठन तय
राजग सत्ता में आई तो नई सरकार में दो नए मंत्रालयों का गठन तय है। इनमें एक पिछड़ा कल्याण मंत्रालय तो दूसरा मछुआरा कल्याण मंत्रालय होगा। भाजपा इन मंत्रालयों के जरिए ओबीसी वर्ग के साथ मछुआरा वर्ग को लंबे समय के लिए साधे रखना है।
विपक्षी कुनबे को मनोवैज्ञानिक दबाव में रखने की रणनीति
राजग से बाहर के राजनीतिक दलों के लगातार संपर्क में रहकर भाजपा विपक्षी खेमे, खासतौर पर कांग्रेस पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बनाए रखना चाहती है। अंतिम परिणाम एग्जिट पोल्स के अनुरूप रहने की स्थिति में भी पार्टी अपने साथ अन्य दलों को जोड़कर संदेश देगी कि न सिर्फ जनता बल्कि खुद विपक्षी दल कांग्रेस के साथ नहीं रहना चाहते। पार्टी अपनी स्वीकार्यता का दायरा और बड़ा दिखाना चाहती है।