देश की आर्थिक राजधानी मुंबई व आसपास के उत्तर भारतीयों पर सभी दल फिर मेहरबान नजर आ रहे हैं। यहां रहने वाले यूपी, बिहार, उत्तराखंड के करीब 40 लाख उत्तर भारतीय 10 सीटों पर हार-जीत का फैसला करते हैं। इसलिए कांग्रेस-एनसीपी से लेकर भाजपा-शिवसेना तक डोरे डाल रहे हैं। दस साल पहले तक मुंबई में उत्तर भारतीय कांग्रेस के वोटबैंक माने जाते थे लेकिन, मोदी लहर में स्थिति बदल गई। इस बार दोनों दल उत्तर भारतीय समाज को अपने साथ जोड़े रखने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।
मुंबई का मिजाज मिनी भारत जैसा है। लेकिन, वोटबैंक के लिए मराठी, उत्तर भारतीय, गुजराती, मुस्लिम व दक्षिण भारतीयों पर दलों का पूरा फोकस होता है। मुंबई में लोकसभा की छह सीटें हैं। इन छह सीटों पर करीब 17 लाख उत्तर भारतीय मतदाता हैं। अमूमन दो से पौने तीन लाख उत्तर भारतीय मतदाता हर सीट पर हैं। ठाणे, पालघर, कल्याण और रायगढ़ सीट पर भी उत्तर भारतीय मतदाताओं की अच्छी संख्या है।
मुंबई का मराठी भाषी मतदाता हमेशा से शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के साथ रहा है। वहीं, गुजराती मतदाता भाजपा का पक्का वोटबैंक कहा जाता है जबकि उत्तर भारतीय व दक्षिण भारतीयों का रुझान पहले कांग्रेस की तरफ रहा है। 2014 में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को उत्तर भारतीयों ने भरपूर समर्थन दिया, जिससे मुंबई व आसपास की सीटें भगवामय हो गई थीं। विधानसभा चुनाव में अलग लड़ी भाजपा ने तब गुजराती, उत्तर व दक्षिण भारतीय समाज को साधे रखा।
गैरमराठी भाषियों में ताकतवर हैं मुस्लिम
मुंबई के गैरमराठी भाषियों में मुस्लिम समाज सबसे ताकतवर माना जाता है। मुंबई में दबदबा रखने वाले ज्यादातर मुस्लिम नेता यूपी से हैं। कांग्रेस के पूर्व मंत्री मो.आरिफ नसीम खान आंबेडकर नगर, एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक बस्ती, असलम शेख कानपुर और सपा विधायक अबू आसिम आजमी आजमगढ़ जिले से हैं। वहीं, गैर मुस्लिम उत्तर भारतीय नेताओं में भी यूपी का दबदबा है। सबसे बड़ा चेहरा पूर्वमंत्री कृपाशंकर सिंह हैं। इसके अलावा मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरूपम, पूर्व विधायक राजहंस सिंह, पूर्व विधायक रमेश सिंह, फिल्मसिटी बोर्ड के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्र, आरयू सिंह, चंद्रकांत त्रिपाठी सहित भाजपा विधायक व उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष आरएन सिंह प्रमुख नेता हैं।
9 लाख उत्तर भारतीय चले गांव की ओर
मुंबई और आसपास में रहने वाले उत्तर भारतीय हर वर्ष गर्मियों की छुट्टियों में गांव की ओर चल पड़ते हैं। इस साल अब तक करीब साढ़े नौ लाख उत्तर भारतीय अपने गांव रवाना हो चुके हैं। मुलुक जाने वाले अधिकतर हालांकि मुंबई के वोटर नहीं हैं लेकिन, जो यहां के मतदाता हैं उनमें से भी लाखों लोग गांव चल पड़े हैं। मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी एके सिंह बताते हैं कि इस बार यूपी, बिहार के लिए 626 समर हॉलिडे स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं। वहीं, 105 रेगुलर रेलगाड़ियां चलती हैं। जाहिर सी बात है कि उत्तर भारतीयों के गांव जाने का नुकसान भाजपा और कांग्रेस दोनों को होगा।
ऐन चुनाव के मौके पर भाजपा ने बांटी रेवड़ियां
मुंबई में भाजपा के उत्तर भारतीय नेता उतने ताकतवर नहीं हैं, जितने कांग्रेस के नेता यहां प्रभावी रहे। लेकिन इस बार कांग्रेस ने जहां संजय निरूपम, प्रिया दत्त और मिलिंद देवड़ा को टिकट िदया। वहीं, भाजपा ने ऐन लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के करीब आधा दर्जन उत्तर भारतीय नेताओं को निगम और बोर्ड के पद रेवड़ियों की तरह बांटे। फिर भी, संतुलन नहीं बन पाया है।
शिवसेना दे रही दुहाई, नहीं की कभी बदसलूकी
चुनाव के दौरान उद्धव ठाकरे ने उत्तर भारतीय समाज सम्मेलन में दावा किया कि शिवसेना ने कभी उत्तर भारतीयों के साथ बदसलूकी नहीं की। उनका परोक्ष कहना है कि मनसे के लोगों ने उत्तर भारतीयों को निशाना बनाया था।
समाज की शीर्ष संस्था उत्तर भारतीय संघ
उत्तर भारतीय संघ मुंबई के उत्तर भारतीय समाज की शीर्ष संस्था है। विधान परिषद सदस्य चुने जाने के बाद संघ के अध्यक्ष आरएन सिंह का झुकाव भाजपा की तरफ है। सिंह कहते हैं, समाज को पता है कि केंद्र व राज्य में किस दल की सरकार होने से देश हित सुरक्षित है। ईमानदार कार्यकाल के बूते नरेंद्र मोदी एक बार फिर उत्तर भारतीय समाज की पहली पसंद हैं।