बीते लोकसभा चुनाव में मोदी मैजिक के सहारे दिल्ली में क्लीन स्वीप करने वाली भाजपा इस चुनाव में भी मोदी मैजिक के सहारे है। आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस के बीच गठबंधन न होने से सभी सात सीटों पर त्रिकोणात्मक जंग ने भाजपा की उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं। कांग्रेस ने सभी सीटों पर हैवीवेट चेहरे उतार कर आप की परेशानी बढ़ा दी है।
राजधानी में भाजपा और विपक्ष के बीच आमने सामने की जंग के लिए कांग्रेस-आप में गठबंधन जरूरी माना जा रहा था। 2014 में दोनों दलों को संयुक्त 48 फीसदी वोट मिले थे, जो भाजपा को मिले वोटों से 1.6 फीसदी ज्यादा थे। वहीं इसके करीब एक साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-आप को मिले संयुक्त वोट भाजपा के वोटों से दोगुने (आप-कांग्रेस 64 फीसदी, भाजपा 32 फीसदी) हो चुके थे। जाहिर तौर पर अगर आप और कांग्रेस का चुनाव पूर्व गठबंधन होता तो कड़ा मुकाबला होता। चूंकि यहां आप व कांग्रेस का वोट बैंक एक ही है। ऐसे में अब इस वोट बैंक में बंटवारा तय माना जा रहा है।
उम्मीदवारी में ग्लैमर का तड़का: भाजपा और कांग्रेस दोनों ने कला और फिल्म जगत व खेल से जुड़ी हस्तियों को मैदान में उतार कर ग्लैमर का तड़का लगाया है। भाजपा की ओर से मशहूर गायक हंसराज हंस, क्रिकेटर गौतम गंभीर, अभिनेता मनोज तिवारी तो कांग्रेस ने ओलंपियन बॉक्सर विजेंदर सिंह को मैदान में उतारा है।
जातीय गणित
बीते चुनाव में पूर्वांचल समुदाय, जाट, गुर्जर, अगड़े, उत्तराखंड समुदाय (6%) और वैश्य के बड़े हिस्से व एससी के एक हिस्से ने भाजपा का दामन थाम लिया था। हालांकि इसके एक साल बाद हुए चुनाव में एससी, मुस्लिम, पूर्वांचल समुदाय के मतदाताओं के बड़े हिस्से के साथ-साथ मध्य वर्ग ने आप का साथ दिया।
आप से खुद को ज्यादा ताकतवर दिखाना चाहती है कांग्रेस
कांग्रेस ने शीला दीक्षित, जयप्रकाश अग्रवाल, अजय माकन, अरविंदर सिंह लवली, महाबल मिश्रा, बॉक्सर विजेंदर सिंह और राजेश लिलोठिया के रूप में हैवीवेट उम्मीदवार उतारे हैं। चूंकि आप और कांग्रेस का वोट बैंक करीब करीब एक है। ऐसे में कांग्रेस अपने खोये वोट बैंक को हासिल करने के लिए खुद को आप से ज्यादा ताकतवर दिखाना चाहती है। ऐतिहासिक तथ्य यह है कि किसी राज्य में भाजपा के अलावा किसी क्षेत्रीय दल के सत्ता में आने के बाद पार्टी दोबारा वहां अपने दम पर सत्ता हासिल नहीं कर पाई है। बिहार, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना जैसे कई राज्य इसके उदाहरण हैं। कांग्रेस दिल्ली में इस मिथक को तोड़ना चाहती है।
भाजपा ने बनाई त्रिस्तरीय रणनीति
पुराना प्रदर्शन दोहराने के लिए भाजपा ने त्रिस्तरीय रणनीति बनाई है। पार्टी यहां पीएम मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व, संघ की ताकत और बेहतर बूथ प्रबंधन के सहारे मैदान मारने की कोशिश में है। संघ के पांच हजार प्रशिक्षित स्वयंसेवकों ने इसी हफ्ते अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है।
प्रमुख मुद्दे
भाजपा पूरे चुनाव को राष्ट्रवाद पर केंद्रित करने में जुटी है। सर्जिकल स्ट्राइक, आतंकी मसूद अजहर पर प्रतिबंध आदि को भाजपा मोदी की उपलब्धि बताकर प्रचारित कर रही है। आप और कांग्रेस जीएसटी-नोटबंदी से परेशानी, दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा न मिलने जैसे मुद्दे उठा रही है।
उत्तर-पूर्वी सीट पर सबसे दिलचस्प मुकाबला
सातों सीटों में से नॉर्थ ईस्ट सीट पर मुकाबला सबसे दिलचस्प है। यहां तीनों प्रमुख दलों ने अपने अपने प्रदेश अध्यक्षों को मैदान में उतारा है। तीन उम्मीदवार ब्राह्मण बिरादरी के होने के साथ-साथ पूर्वांचल समुदाय से भी हैं। भाजपा ने इस सीट पर मनोज तिवारी, कांग्रेस ने शीला दीक्षित और आप ने दिलीप पांडे को टिकट दिया है।