भाजपा के पितामह लाल कृष्ण आडवाणी ने अपनी नाराजगी जाहिर की, नाराजगी के एक दिन बाद मार्ग दर्शक मंडल के दूसरे सदस्य डॉ मुरली मनोहर जोशी उनसे मिलने पहुंच गए। कांग्रेस अध्यक्ष ने राहुल गांधी ने इसको लेकर भाजपा के जले पर नमक छिड़क दिया तो विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आडवाणी को पिता तुल्य बताकर नई गरमाहट पैदा कर दी है। देर से ही सही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को इसका एहसास हुआ है। उच्चपदस्थ सूत्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार अमित शाह यह गिले-शिकवे दूर करना चाहते हैं।
सोमवार को होगी भेंट
सोमवार को भाजपा अध्यक्ष पहले डॉ मुरली मनोहर जोशी के पास जाएंगे। उनके पास शाह का सुबह 9.45 बजे जाने का कार्यक्रम है। इसके ठीक बाद अमित शाह लाल कृष्ण आडवाणी के पास जाएंगे। शाह के साथ भाजपा के संगठन मंत्री रामलाल के होने की सूचना है। इससे पहले रामलाल ही दोनों नेताओं के पास पार्टी द्वारा उम्मीदवार न बनाए जाने की जानकारी देने गए थे। तब रामलाल ने आग्रह किया था कि दोनों वरिष्ठ नेता लिखकर दे दें कि वह (आडवाणी और जोशी) उम्र अधिक होने के कारण खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते। लेकिन दोनों ही नेताओं ने पार्टी के इस तरह के तौर तरीके पर आपत्ति जताते हुए रामलाल को बैरंग लौटा दिया था। तब रामलाल ने कहा था कि वह उनका संदेश पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा देंगे।
बताते हैं इसके बाद भाजपा अध्यक्ष ने लालकृष्ण आडवाणी से मिलने का समय मांगा था। अमित शाह गांधीनगर से पहले आडवाणी का आशीर्वाद लेना चाहते थे, लेकिन उन्हें आडवाणी ने इसका अवसर नहीं दिया। भाजपा ने यह कमी गांधीनगर में नामांकन के दौरान पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान गृहमंत्री राजनाथ सिंह से शाह को आडवाणी का उत्तराधिकारी की घोषणा कराकर पूरी की। लेकिन इसके बाद लालकृष्ण आडवाणी का ब्लॉग लिखना भाजपा को कुछ ज्यादा अखर रहा है। आडवाणी के इस ब्लॉग की चर्चा भाजपा के भीतर और खूब है।