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लोकसभा चुनाव 2019 : मुख्य चुनावी नारे की गुत्थी सुलझाने में जुटे अमित शाह

Tue, 15 Jan 2019 05:01 AM IST
Gaurav Pandey हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
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अमित शाह (फाइल फोटो)
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‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ की थीम पर लोकसभा चुनाव, 2014 फतह करने वाली भाजपा आम चुनाव, 2019 के मुख्य नारे की गुत्थी सुलझाने में जुट गई है। पार्टी नेतृत्व को हाल में संपन्न राष्ट्रीय परिषद की थीम ‘अबकी बार फिर मोदी सरकार’ में पिछले चुनाव की थीम की तरह अपील नहीं दिख रही। मुख्य नारा तय करने के लिए हाल में गठित चुनाव प्रचार समिति की तीन बैठकों में किसी एक नारे पर सहमति नहीं बन पाई। अब बुधवार को खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह प्रचार समिति की टीम के साथ इस पर माथापच्ची करेंगे।

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सूत्रों ने बताया कि इस विषय पर रविवार को भी समिति की मैराथन बैठक हुई। विकल्प के तौर पर फिर एक बार मोदी सरकार, एक बार फिर मोदी सरकार, मजबूर सरकार बनाम मजबूत सरकार जैसे नारों पर भी माथापच्ची हुई। हालांकि, इन नारों पर भी अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका। समिति के सदस्यों को बुधवार की बैठक में नए विचार के साथ बुलाया गया है। 

समिति इस संबंध में इस क्षेत्र के कुछ पेशेवरों की भी राय ले रही है। समिति के एक सदस्य ने बताया कि पार्टी नेतृत्व ऐसा मुख्य चुनावी नारा चाहता है, जिसमें पीएम मोदी का विराट व्यक्तित्व तो रेखांकित हो ही, साथ ही नारे के प्रति ऐसा आकर्षण पैदा हो जो लोगों की जुबान पर तेजी से चढ़े। नारा ऐसा भी नहीं हो जो 2004 के ‘इंडिया शाइनिंग’ और ‘फील गुड’ की तरह पार्टी को उल्टा पड़ जाए।
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पार्टी का मकसद है कि नारे में बीते पांच साल में सकारात्मक बदलाव का संदेश तो हो, लेकिन इसमें भविष्य में बाकी बचे कार्यों के लिए अच्छी और मजबूत नींव पड़ने का संदेश जाए। यही कारण है कि ‘अबकी बाद फिर मोदी सरकार’ में फिर शब्द आने से लय टूटने के कारण इससे मिलते-जुलते दूसरे सुझावों को फिलहाल टाल दिया गया है।

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मोदी के व्यक्तित्व को सामने रखने की चुनौती

भाजपा बीते चुनाव की तरह ही पीएम नरेंद्र मोदी को ही अपना चेहरा बनाएगी। ऐसे में प्रचार समिति के सामने उनके सकारात्मक व्यक्ति को उभारने की चुनौती है। पीएम के व्यक्तित्व को आम मतदाताओं के सामने रखने के लिए पार्टी ने इसके दो पक्ष नेतृत्व और प्रदर्शन को बेहतर तरीके से उभारने का फैसला किया है। प्रदर्शन के पक्ष में गरीब परक आधा दर्जन योजनाओं के व्यापक प्रचार की रणनीति बनी है, तो नेतृत्व के पक्ष को नीयत, मेहनत और निर्णायक के रूप में सामने रखने की योजना है। 

नीयत के पक्ष में भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देने, मेहनत के पक्ष में विरोधियों के भी पीएम के 18-18 घंटे काम करने और निर्णायक के पक्ष में सबसे बेपरवाह रहते हुए देशहित में जीएसटी, नोटबंदी जैसे फैसले लेने को सामने लाने की रणनीति बनी है।
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