भाजपा प्रत्याशी के सुरेंद्रन (फाइल फोटो)
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केरल की पट्टनमिट्टा लोकसभा सीट से भाजपा ने के सुरेंद्रन को अपना प्रत्याशी बनाया है। वह यहां एक अप्रत्याशित लड़ाई लड़ रहे हैं। एक मामले में वह अपने प्रतिद्वंदियों से काफी आगे हैं। यह मामला है उनके खिलाफ लंबित मामले। दरअसल, सुरेंद्रन के खिलाफ 242 आपराधिक मामले दर्ज हैं। जिसमें से 222 मामले केवल सबरीमाला से संबंधित हैं।
भाजपा के मुखपत्र जन्मभूमि में उन्होंने इन आपराधिक मामलों के बारे में ब्योरा दिया है। जिसमें चार पेज लग गए। पार्टी को अपने टीवी चैनल जनम टीवी पर सुरेंद्रन के आपराधिक मामलों का ब्योरा देने में 60 सेकेंड का समय लगा। जबकि अन्य उम्मीदवारों के बारे में ब्योरा देने में केवल सात सेकेंड का समय लगा।
पार्टी के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, 'यदि किसी दूसरे अखबार के केवल एक संस्करण में उनके ब्योरे के बारे में विज्ञापन दिया जाता तो उसका खर्च करीब 60 लाख रुपये आता। टीवी पर इसका खर्च और ज्यादा आता।' चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने खिलाफ लंबित मामलों के बारे में प्रिंट और टीवी पर तीन बार विज्ञापन दें।
आयोग के इसी निर्देश के तहत के सुरेंद्रन ने विज्ञापन दिया था। पार्टी के मुखपत्र में उनके खिलाफ लंबित मामलों की जानकारी देने में चार पेज लग गए जबकि टीवी पर एक मिनट लग गया। केरल भाजपा के प्रवक्ता एमएस कुमार का कहना है कि सबरीमाला को लेकर सुरेंद्रन के खिलाफ दर्ज मामले कानून के दायरे में नहीं आते हैं। कुछ ममाले चुनाव से ठीक पहले दर्ज हुए हैं। जिसके कारण उन्हें उनके खिलाफ लड़ने का पर्याप्त समय नहीं मिला।
सबरीमाला आंदोलन को लेकर पिछले साल दिसंबर में सुरेंद्रन लगभग 22 दिन जेल में रहे थे। पहले उन्होंने 30 मार्च को अपना नामांकन दाखिल किया था और बताया था कि उनके खिलाफ 20 मामले दर्ज हैं। हालांकि बाद में उन्होंने राज्य सरकार को 29 मार्च को दिए हलफनामे में कहा कि उनके खिलाफ 240 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। जिसके बाद उन्हें दोबारा नामांकन दाखिल करना पड़ा।