बजट सत्र के दूसरे हिस्से की शुरुआत से लगातार चार दिन (2 से 5 मार्च) तक लोकसभा में हुए हंगामे की जांच के लिए शुक्रवार को संसदीय कमेटी का गठन किया गया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की अध्यक्षता में यह कमेटी पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। शुक्रवार को सदन संचालित कर रहे भाजपा सांसद किरीट प्रेमजीभाई सोलंकी ने इसकी घोषणा की।
दरअसल, कांग्रेस सांसदों के व्यवहार से आहत बिरला तीन दिन से सदन की कार्यवाही संचालित नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस के बृहस्पतिवार को सात सांसदों के निलंबन के बावजूद वह शुक्रवार को भी सदन नहीं पहुंचे। वह कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के आसन से कागज छीनने और कागज फाड़कर फेंकने से आहत हैं।
दिल्ली हिंसा को लेकर सरकार के बयान और गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग पर अड़े विपक्ष ने पूरे सप्ताह सदन नहीं चलने दिया। इस दौरान कांग्रेस और भाजपा सांसदों के बीच कई बार धक्का मुक्की की नौबत भी आई। बिरला चाहते हैं कि कार्यवाही संचालन के दौरान सांसदों के व्यवहार पर एक स्पष्ट और कठोर गाइड लाइन तय हो।
सांसदों के लिए गाइड लाइन तय होगी
सूत्रों के मुताबिक कमेटी कार्यवाही के दौरान सांसदों के व्यवहार के लिए सर्वसम्मति से गाइडलाइन बनाएगी जिस पर सख्ती से अमल करना होगा। बीते सत्र में स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सदन के असभ्य व्यवहार करने के मामले में सजा को कठोर करने की सिफारिश की थी। हालांकि इसके तत्काल बाद आए लोकसभा चुनाव के कारण इस मामले में आगे नहीं बढ़ा जा सका।
गोगोई की सदस्यता रद्द करने का प्रस्ताव
सरकार ने गोगोई की सदस्यता रद्द करने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही साफ किया है कि सांसदों के निलंबन पर समझौता नहीं करेगी। ऐसे में अगर कमेटी की जांच में गोगोई के व्यवहार को आपत्तिजनक माना गया तो उनकी सदस्यता खतरे में पड़ सकती है। पिछली लोकसभा में स्पीकर सुमित्रा महाजन ने जिन सांसदों का निलंबन किया था, उसमें गोगोई भी शामिल थे।