दिसंबर 2010 में मुंबई की एक सभा में दिग्विजय ने दावा किया कि 26/11 हमले के चंद घंटे पहले उनकी हेमंत करकरे से बातचीत हुई थी। इस दावे ने देश के सियासी हलकों में सनसनी फैला दी। जब दिग्विजय पर झूठ बोलने के आरोप लगे तो उन्होंने बाकायदा बीएसएनएल के रिकॉर्ड पेश कर दिए। इन रिकॉर्ड ने साबित कर दिया कि वाकई करकरे की दिग्विजय से कई मौकों पर बात हुई थी। लेकिन धमाका हुआ उस दावे से जो दिग्विजय ने तब किया। उन्होंंने कहा कि करकरे ने मुझे फोन पर बताया कि मालेगांव बमकांड में ‘हिंदू आतंकवादियों’को पकड़ने से उनकी जान को दक्षिणपंथी यानी हिंदू संगठनों से खतरा है। इस बयान पर इतना हंगामा मचा कि कांग्रेस को इससे पल्ला झाड़ना पड़ा। हेमंत करकरे की पत्नी कविता करकरे ने भी दिग्विजय को कठघरे में खड़ा किया।
इस बीच दिग्विजय पर ये भी आरोप लगे कि मालेगांव मामले को लेकर करकरे उनसे कई बार बातचीत करते थे।