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VIP EXIT POLL: बेगूसराय में कन्हैया कुमार मुश्किल में, गिरिराज पड़ सकते हैं भारी 

Tue, 21 May 2019 09:10 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गिरिराज सिंह-कन्हैया कुमार - फोटो : Amar Ujala
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23 मई को आने वाले नतीजे का इंतजार पूरा देश कर रहा है। उसपर भी इंतजार है दिग्गजों की सीट पर आने वाले नतीजों का। 19 मई को दिखाए गए एग्जिट पोल में अधिकतर एजेंसियों ने एनडीए को बहुमत का अनुमान जताया है। वीआईपी उम्मीदवारों का क्या हाल है, इसपर भी एग्जिट पोल दिखाया गया है और कई अनुमान चौंकाने वाले रहे। ऐसी ही एक सीट है बिहार की बेगूसराय। न्यूज 18-इप्सॉस का एग्जिट पोल क्या कह रहा है जानिए।  

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दिल्ली यूनिवर्सिटी की राजनीति से मशहूर हुए कन्हैया कुमार इस बार सीपीआई के टिकट पर बिहार के बेगूसराय से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने भाजपा ने अपने बयानों के लिए चर्चित और विवादित रहे गिरिराज सिंह को मैदान में उतारा। हालांकि गिरिराज पहले इस सीट से लड़ने को बिल्कुल तैयार नहीं थे, लेकिन हाईकमान के रुख के आगे उन्हें झुकना ही पड़ा। न्यूज 18 - IPSOS का एग्जिट पोल बता रहा है कि यहां कन्हैया की सीट फंस सकती है।

कन्हैया ने गिरिराज सिंह को ललकारते हुए कहा था कि अब देखा जाएगा कि विरोधियों को पाकिस्तान भेजने वाले अब कहां जाते हैं। कन्हैया के प्रचार के लिए बड़ बड़ी हस्तियां यहां पहुंची। इनमें गुजरात के युवा दलित नेता जिग्नेश मेवाणी से लेकर गीतकार जावेद अख्तर जैसे लोग शामिल थे। कन्हैया ने प्रचार जबरदस्त किया लेकिन एग्जिट पोल नतीजा उनके हार की भविष्यवाणी कर रहा है। 
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राजद की ओर से यहां से चुनाव लड़ रहे तनवीर हसन बेगूसराय के दिग्गज नेता रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के भोला सिंह और तनवीर हसन के बीच कड़ी टक्कर थी, जिसमें भाजपा ने बाजी मार ली थी। 

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कन्हैया कुमार और गिरिराज सिंह दोनों की कोशिश भूमिहार जाति के मतदाताओं को अपने पाले में खींचना था। ये दोनों ही प्रत्याशी भूमिहार जाति से आते हैं। बेगूसराय के 19 लाख वोटरों में से ऊंची जाति के भूमिहारों की संख्या लगभग 19 फीसदी है, वहीं, दूसरे नंबर पर 15 फीसदी मतदाता मुसलमान हैं। 12 फीसदी यादव और 7 फीसदी कुर्मी जाति के मतदाता हैं। नीतीश की पार्टी का साथ मिलने के बाद बीजेपी को पूरा भरोसा था कि वो भूमिहार, ऊंची जाति और कुर्मी जाति के वोटरों के मिलाकर करीब 37 फीसदी वोटों पर कब्जा कर लेगी। लेकिन कन्हैया कुमार के यहां से चुनाव लड़ने की वजह से भाजपा के भूमिहार और पिछड़े वर्ग वोटरों में सेंध लग गई। 

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