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पुत्र मोह में फंसे कांग्रेस के दो मुख्यमंत्री, कहीं भारी न पड़ जाए!

Wed, 15 May 2019 11:15 PM IST
Abhishek Singh डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कमलनाथ-अशोक गहलोत - फोटो : social Media
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लोकसभा चुनाव में अंतिम चरण का मतदान बाकी है, लेकिन पार्टियों ने बूथ रिपोर्ट के आधार पर अभी से सीटों का विश्लेषण करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस पार्टी को अपनी बूथ रिपोर्ट से पता चला है कि उसे दो राज्यों में उम्मीद से कम सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद इस बाबत कांग्रेस अध्यक्ष को एक रिपोर्ट सौंपी जाएगी। सूत्रों का कहना है कि मध्यप्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्री अपने अपने पुत्रों को विजयी बनाने के चक्कर में दूसरी सीटों पर ध्यान नहीं दे पाए। इससे दोनों राज्यों में कांग्रेस को उम्मीद से कम सीटें मिलती दिख रही हैं।

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बता दें कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ छिंदवाड़ा सीट से चुनाव मैदान में थे। हालांकि इस सीट पर लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में यानी 29 अप्रैल को वोटिंग हो चुकी है, लेकिन बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री का ध्यान दूसरी सीटों की बजाए छिंदवाड़ा पर ही ज्यादा लगा रहा। भाजपा ने 2014 के चुनाव में यहां 29 में से 26 सीटें जीती थी, कांग्रेस के हिस्से तीन सीटें आई थी। ये परिणाम तब आए थे जब देश में मोदी लहर के अलावा मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार थी। 

चूंकि अब वहां पर कांग्रेस पार्टी की सरकार है, इसलिए 15-16 लोकसभा सीटें मिलने की उम्मीद की जा रही है। पहले चरण के मतदान से पहले इसी तरह का आंकलन लगाया गया था। बाद में यह अनुमान 10 सीटों के आसपास पहुंचने की बात कही जा रही है। कमलनाथ खुद विधानसभा का चुनाव भी लड़ रहे हैं। इसी तरह राजस्थान में भी भाजपा ने सभी 25 सीटें जीत ली थी। इस बार वहां कांग्रेस की सरकार बन गई और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत जोधपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में हैं। 
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राजस्थान में 29 अप्रैल और 6 मई को लोकसभा चुनाव के दोनों चरण संपन्न हो चुके हैं। पार्टी नेता का कहना है कि पहले राजस्थान में पार्टी को दस से ज्यादा सीटें मिलने की बात कही जा रही थी, लेकिन अब इसमें भी कम से कम तीन-चार सीटों की गिरावट हो सकती है।

कमलनाथ और अशोक गहलोत बेटे पहली बार चुनाव मैदान में  

दोनों ही राज्यों में मुख्यमंत्रियों के पुत्र पहली बार राजनीति में उतर रहे हैं। हालांकि छिंदवाड़ा सीट पर 2014 के आम चुनाव में कमलनाथ ने 5,59,755 वोट लेकर जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा के चंद्रभान कुबेर सिंह 4,43,218 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे। इससे पहले 1980, 1984, 1989 व 1991 में भी कांग्रेस उम्मीदवार कमलनाथ ने ही इस सीट पर कब्जा जमाए रखा था। इसके बाद 1996 में कांग्रेस की अलका कमलनाथ, 1997 के उपचुनाव में भाजपा के सुंदरलाल, 1998, 1999, 2004 व 2009 में कांग्रेस के कमलनाथ ने इस सीट से जीत दर्ज की थी। 

इस बार यहां पर भाजपा ने नाथन शाह को टिकट दिया है। वे नकुल को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने पुत्र को इस सीट पर 2014 में कांग्रेस को मिले वोटों से ज्यादा मत लेकर विजयी बनाने के प्रयासों में लगे रहे हैं। इस वजह से वे कई दूसरी सीटों के लिए पर्याप्त समय नहीं दे पाए। इसी तरह राजस्थान में वैभव गहलौत और भाजपा के निवर्तमान सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत के बीच कांटे की टक्कर बताई गई है। 

गजेंद्र सिंह ने 2014 में कांग्रेस की उम्मीदवार चंद्रेश कुमारी को चार लाख वोटों के अंतर से हराया था।इस बार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है।वे यहां के कई दौरे कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि अशोक गहलोत ने प्रदेश की कई दूसरी सीटों पर उतना ध्यान नहीं दिया है, जितना वे जोधपुर के लिए काम कर रहे हैं।

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