प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वाराणसी से नामांकन दाखिल किया। इससे ठीक एक दिन पहले पूरा बनारस 'भगवा रंग' में रंग चुका था। इस बात की तस्दीक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोड शो और उसमें मौजूद भीड़ से होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नामांकन के दौरान एनडीए की शक्ति दिखी। देशभर से एनडीए के बड़े चेहरे पीएम मोदी के नामांकन के दौरान कलेक्ट्रेट ऑफिस में उनके साथ दिखे। इसमें बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू नेता नीतीश कुमार से लेकर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल प्रमुख प्रकाश सिंह बादल शामिल थे। लोजपा प्रमुख राम विलास पासवान, तमिलनाडु के डिप्टी मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम, शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, एजीपी के दूसरे नेता एवं उत्तर पूर्व लोकतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए) के नेता भी पीएम मोदी के नामांकन के दौरान उनके साथ थे।
91 साल के प्रकाश बादल के पैर छूकर मोदी ने दिया यह संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नामांकन में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल रहे। अमित शाह ने पीएम मोदी का पुष्प गुच्छों के साथ स्वागत किया। पीएम मोदी ने कलेक्ट्रेट ऑफिस में 91 साल के प्रकाश सिंह बादल के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया तब जाकर अपना नामांंकन भरा। उनका यह कदम भाजपा की सहयोगी एनडीए के सभी दलों लिए खास संदेश भरा था। दरअसल, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के एनडीए से बाहर निकलने के बाद घटक दलों में भी विरोध के सुर देखे जा रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक कदम से इसे पूरा साध लिया। शिवसेना भी वक्त-वक्त पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को लेकर मुखर रही है। अकाली दल की तरफ से भी नाराजगी जाहिर की गई थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नामांकन में सभी को बुलाकर एक बार फिर भाजपा ने अपने घटक दलों की नाराजगी को साध लिया और विपक्ष को एनडीए की शक्ति का परिचय दिया।
वायनाड नामांकन: राहुल गांधी यूपीए नेताओं को साथ लाने में चूक गए थे
यह भी कहा जा रहा है कि पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने सभी घटक दलों को यह साफ संदेश दिया है कि वह चुनाव तक हर हाल में एकता दिखाए। इस दौरान किसी भी तरह की अनगल बयानबाजी और विरोध से दूर रहे। क्योंकि अगर घटक दलों में ही नाराजगी झलकेगी तो कांग्रेस इसका फायदा उठा सकती है। इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी पर लीड ली है।वैसे भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 'चौकीदार चोर है' के जरिए पीएम मोदी के खिलाफ लगातार हमलावर हैं और अमेठी में नामांकन के दौरान उनका पूरा परिवार उनके साथ दिखा था। हांलाकि, केरल के वायनाड में राहुल गांधी के नामांकन के दौरान उनके साथ सिर्फ प्रियंका गांधी थी और बाकी का कोई सहयोगी दल नहीं था। इस मामले में राहुल गांधी यूपीए के बड़े चेहरों को साथ लाने और शक्ति प्रदर्शन करने को लेकर चूक गए।
अखिलेश ने भी माया-मुलायम को एक मंच पर लाकर किया था कमाल
वैसे भी कांग्रेस की यूपी में सपा-बसपा के साथ गठबंधन डील नहीं हो पाने की वजह से आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बिहार में राहुल गांधी की तीन रैलियों को छोड़कर पहले ही कांग्रेस को शर्मिंदा कर दिया है। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि अगर राहुल गांधी के नामांकन के दौरान अगर यूपीए नेता एक साथ दिखते तो इससे अच्छा संदेश जाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नामांकन के दौरान एनडीए के सभी बड़े नेता एक साथ दिखे। मोदी के इस कदम से पार्टी और उसके गठबंधन सहयोगियों को अच्छा संदेश जाएगा और उनका विश्वास भी मजबूत होगा। दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने भी मायावती और मुलायम को एक मंच पर लाकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। लेकिन राहुल गांधी ऐसा कुछ नहीं कर पाए।