भाजपा उम्मीदवार एस.एस.आहलुवालिया पिछली बार इस सीट से जीत कर केंद्र में मंत्री बने थे। लेकिन वर्ष 2017 में पर्वतीय इलाके में अलग राज्य की मांग में महीनों लंबी हिंसा और आगजनी के दौरान उनके इलाके से गायब रहने की वजह से आम लोगों में भारी नाराजगी थी। इसी वजह से उनका पत्ता साफ करते हुए भाजपा ने मोर्चा के विमल गुरुंग गुट और गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट (जीएनएलएफ) के समर्थन से एक कारोबारी राजू सिंह बिष्ट को इस सीट पर अपना उम्मीदवार बनाया है।
विनय तामंग की अगुवाई वाले मोर्चा गुट ने तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार अमर सिंह राई का समर्थन करने का एलान किया है। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता शंकर मालाकार मैदान में हैं तो माकपा ने अपने पूर्व राज्यसभा सांसद सुमन पाठक को अपना उम्मीदवार बनाया है।
उत्तर दिनाजपुर जिला मुख्यालय रायगंज की संसदीय सीट पर पिछली बार माकपा उम्मीदवार मोहम्मद सलीम जीते थे। लेकिन अभकी उनकी राह भी आसान नहीं है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में वे महज 1634 वोटों के अंतर से जीते थे। इस बार भी इस सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी की पत्नी दीपा दासमुंशी कांग्रेस उम्मीदवार हैं। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ने भी यहां पूरी ताकत झोंक दी है।
यह संसदीय सीट लंबे अरसे तक कांग्रेस का गढ़ रही है। पहले यहां वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रियरंजन दासमुंशी जीतते रहे हैं और उसके बाद उनकी पत्नी दीपा दासमुंशी यहां चुनाव जीत चुकी हैं। लेकिन वर्ष 2014 के चुनावों में भाजपा के मजबूती से लड़ने की वजह से कांग्रेस के समीकरण गड़बड़ गए। भाजपा के कांग्रेस वोट बैंक में गहरी सेंध लगाने की वजह से माकपा के मोहम्मद सलीम कम वोटों के अंतर से ही सही, यहां जीत गए थे।
पिछली बार सलीम को 29 फीसदी वोट मिले थे और उनकी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार दीपा दासमुंशी को 28.5 फीसदी। तब यहां भाजपा व तृणमूल कांग्रेस को क्रमश: 18.32 और 17.39 फीसदी वोट मिले थे। तृणणूल कांग्रेस ने इस बार यहां अपने विधायक और स्थानीय नगरपालिका अध्यक्ष कन्हैया लाल अग्रवाल को मैदान में उतारा है जबकि भाजपा ने अपने प्रदेश महासचिव देवश्री चौधरी को।