Rahul Gandhi, BabuLal Marandi, Hemant Soren(File Photo)
भाजपा के बरक्स उसकी धुरविरोधी कांग्रेस ने झारखंड में सूझबूझ भरी रणनीति की बदौलत मजबूत गठबंधन किया है। सीट बंटवारे वाले दिन लालू प्रसाद यादव की करीबी और राजद की प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी को भाजपा ने अपने पाले में कर लिया, बावजूद इसके महागठबंधन यहां ठीक ठाक गठबंधन कर पाने में कामयाब रही। कांग्रेस यहां सात, शिबू और हेमंत सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा चार, बाबू लाल मरांडी की झारखंड विकास मोर्चा दो और राजद एक सीट पर भाजपा के टक्कर में है। केवल चतरा में राजद की बगावत को छोड़ दें तो महागठबंधन झारखंड में मजबूत दिखता है।
अंतिम चरण की तीन सीटों का सियासी समीकरण
अंतिम चरण की तीन सीटों में से गोड्डा में भाजपा मजबूत दिखती है, तो दुमका में झामुमो। वहीं राजमहल में भी मुकाबला कड़ा है। गोड्डा में भाजपा के मौजूदा सांसद कद्दावर नेता निशिकांत दुबे को गठबंधन के प्रदीप यादव चुनौती देने की कोशिश में हैं। राजमहल में एनडीए के हेमलाल मुर्मू और यूपीए के विजय कुमार हंसदक के बीच टक्कर है। वहीं, दुमका में शिबू सोरेन के सामने उनके ही चेले रहे सुनील सोरेन कमजोर दिखते हैं।
झारखंड में 'गुरुजी' के नाम से जाने जाने वाले शिबु सोरेन ने तो यहां तक कह डाला कि पीएम मोदी के 'बाप' भी आ जाएं तो उन्हें नहीं हरा सकते। इस विवादित बयान में उनका अहंकार तो दिखता है, लेकिन सियासी समीकरण भी उनके ही पक्ष में नजर आते हैं। झारखंड की सभी 14 लोकसभा सीटों पर भाजपा को मिल रही चुनौतियों को देखा जाए तो स्पष्ट है कि रघुवर दास के लिए मोदी लहर वाला 2014 आम चुनाव दोहराना काफी कठिन होगा।