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पांचवे चरण में बंगाल की सात सीटें दांव पर, भारी मतदान से भाजपा बम-बम

Sat, 04 May 2019 09:26 PM IST
Abhishek Singh रीता तिवारी, कोलकाता
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नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी - फोटो : PTI
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पश्चिम बंगाल में चार चरणों में लोकसभा की 18 सीटों पर भारी मतदान से बम-बम भाजपा अब पांचवें चरण में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) और नागरिकता (संशोधन) विधेयक के हथियार से जंग जीतने के सपने देख रही है। वैसे, ममता बनर्जी भाजपा के इन दोनों हथियारों को लॉलीपॉप बता चुकी हैं। इस दौर में छह मई को जिन सात सीटों पर मतदान होना है वह पिछली बार तृणमूल कांग्रेस ने जीती थी।

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लेकिन अब भाजपा को उम्मीद है कि खासकर बांग्लादेश से सटे इलाकों में उक्त दोनों मुद्दे उसके सिर पर जीत का सेहरा बांध देंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तक अपनी रैलियों में इन दोनों मुद्दों पर जोर देते रहे हैं। अब पांचवां दौर इनकी परीक्षा की घड़ी है। इसी के नतीजे मोदी समेत पार्टी के तमाम दिग्गजों की विश्वसनीयता भी तय करेंगे।

 

बनगांव
इस दौर में बांग्लादेश सीमा से सटी बनगांव सीट सबसे अहम है। इस सीट पर मतुआ समुदाय के वोट ही निर्णायक हैं। पहले तृणमूल कांग्रेस को इस तबके का समर्थन हासिल था और पिछली बार उसके उम्मीदवार कपिल कृष्ण ठाकुर जीत गए थे। इससे पहले वर्ष 2009 में भी यह सीट तृणमूल की ही झोली में गई थी। लेकिन बीते पांच वर्षों के दौरान भाजपा ने इस तबके के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। इसी के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मतुआ समुदाय की राजमाता कही जाने वाली वीणापाणि देवी से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया था। लेकिन अब वीणापाणि देवी के निधन के बाद इस मसुदाय में मतभेद नजर आ रहे हैं।

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इस सीट के नतीजे ही बताएंगे कि भाजपा को मतुआ समुदाय में पैठ बनाने में कितनी कामयाबी मिली है। तृणमूल कांग्रेस ने इस बार यहां ममता ठाकुर को अपना उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने यहां शांतनु ठाकुर को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस ने सौरव प्रसाद और माकपा ने अल्केश दास को टिकट दिया है।

प्रमुख मुद्दा : बांग्लादेश से सटे होने की वजह से सीमा पार से घुसपैठ, नागरिकता (संशोधन) विधेयक और एनआरसी यहां सबसे बड़ा मुद्दा है।

बैरकपुर
बैरकपुर सीट भी काफी अहम है। तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी जीत की हैट्रिक लगाने के लिए मैदान में हैं। भाजपा ने तृणणूल कांग्रेस के पूर्व विधायक अर्जुन सिंह को यहां उनके खिलाफ मैदान में उतारा है। हिंदीभाषी-बहुल यह इलाका किसी दौर में जुट मिलों के लिए मशहूर रहा है। हुगली के किनारे बसे इस इलाके में अब जूट मिलों की तरह हिंदीभाषियों की हालत भी बदहाल है।

कई कल-कारखाने बंद हो चुके हैं। भाजपा हिंदीभाषियों की इसी कमजोर नस के सहारे जीत का सपना देख रही है। वर्ष 2009 में पार्टी को यहां महज 3.56 फीसदी वोट मिले थे जो 2014 में बढ़ कर 21.92 फीसदी तक पहुंच गए। इस आंकड़े से भाजपाई गदगद हैं। कांग्रेस ने यहां मोहम्मद आलम को मैदान में उतारा है और माकपा ने गार्गी चटर्जी को।

प्रमुख मुद्दे : इलाके में बंद होती जूट मिलें और दूसरे कल-काऱखाने हर बार की तरह इन चुनावों में भी मुद्दा हैं।

हावड़ा
कोलकाता से सटी हावड़ा संसदीय सीट पर भी भाजपा जीत के सपने देख रही है। यहां फुटबालर प्रसून चटर्जी पहले उपचुनाव में जीते थे और फिर 2014 के चुनाव में। प्रसून अबकी तीसरी बार मैदान में हैं। भाजपा ने यहां वरिष्ठ पत्रकार रंतीदेव सेनगुप्ता को अपना उम्मीदवार बनाया है जबकि कांग्रेस और माकपा की ओर से क्रमश: सुमित्रा अधिकारी व शुभ्रा घोष मैदान में हैं। प्रसून जहां जीत की हैट्रिक के दावे कर रहे हैं वहीं रंतीदेव का दावा है कि लोगों ने अबकी बदलाव का मूड बना लिया है।

प्रमुख मुद्दे : इलाके की बदहाल सड़कों के अलावा खासकर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं इस बार प्रमुख मुद्दे के तौर पर सामने आई हैं।

उलुबेरिया
हावड़ा जिले की यह दूसरी सीट माकपा का गढ़ रही है। लेकिन वर्ष 2009 से इस पर तृणमूूल कांग्रेस का कब्जा रहा है। वर्ष 2009 औऱ 2014 में तृणमूल कांग्रेस के सुल्तान अहमद ने यह सीट जीती थी। लेकिन बीते साल उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में पार्टी ने सुल्तान की पत्नी सजदा अहमद को टिकट दिया था और सहानुभुति लहर के भरोसे वे 4.74 लाख वोटों के अंतर से जीत गईं।

पिछली बार 23.29 फीसदी वोटों के साथ बाजपा उम्मीदवार अनुपम मल्लिक दूसरे नंबर पर थे। इस बार भी पार्टी ने यहां अभिनेता जय बनर्जी को मैदान में उतारा है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से सजदा अहमद ही किस्मत आजमा रही हैं। माकपा ने अबकी मकसूदा खातून को टिकट दिया है।

प्रमुख मुद्दे : हावड़ा जिले में बंद होने वाले लघु व मध्यम उद्योगों के अलावा सिंचाई और सड़क सुविधाएं।

श्रीरामपुर 
भाजपा ने वर्ष 2014 में इस सीट पर जाने-माने गायक बप्पी लाहिड़ी को मैदान में उतारा था। वे भले चुनाव हार गए थे। लेकिन 22.29 फीसदी यानी 2.87 लाख वोट लेकर भाजपा के मन में भविष्य के लिए उम्मीद की किरण जरूर पैदा कर गए थे। पार्टी ने इस बार देवजीत सरकार को मैदान में उतारा है। तृणमूल की ओर से दो बार यह सीट जीतने वाले कल्याण चटर्जी ही मैदान में हैं।

उन्होंने 2014 में माकपा के तीर्थंकर राय को 1.52 लाख वोटों के अंतर से पराजित किया था। कांग्रेस के देवब्रत विश्वास और माकपा उम्मीदवार तीर्थंकर राय यहां मुकाबले को चौकोना बनाने में जुटी हैं।

प्रमुख मुद्दे  : हुगली जिले की बाकी दो सीटों की तरह यहां बी सड़कें, स्वास्थ्य सुविधाएं और बंद होते कल-कारखाने ही प्रमुख मुद्दे हैं।
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हुगली
हुगली संसदीय सीट पर भाजपा ने अबकी पूर्व अभिनेत्री लाकेट चटर्जी को मैदान में उतारा है। लगातार दो बार यहां जीतने वाली तृणमूल की रत्ना दे नाग इस बार भी मैदान में हैं। माकपा ने प्रदीप साहा और कांग्रेस ने प्रतुल चंद्र साहा को अपना उम्मीदवार बनाया है। बहुजन समाज पार्टी और भाकपा (माले) भी यहां मैदान में है।

भाजपा की ओर से पिछली बार इस सीट पर वरिष्ठ पत्रकार चंदन मित्र ने चुनाव लड़ा था। लेकिन वे तीसरे नंबर पर रहे थे। वर्ष 2014 में रत्ना नाग ने माकपा के प्रदीप साहा को पौने दो लाक से ज्यादा वोटों से हरा कर लगातार दूसरी बैर इस सीट पर कब्जा कर लिया था।

प्रमुख मुद्दे : सड़कों की मरम्मत, पर्यटन का आधारभूत ढांचा मजबूत करना और स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी।

आरामबाग
हुगली जिले की आरामबाग संसदीय सीट पर हार-जीत का अंतर सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा यहां हमेशा राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी का उम्मीदवार ही जीतता रहा है। वर्ष 2009 तक यहां माकपा जीतती रही थी। उसके बाद वर्ष 2014 में यहां तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार की जीत हुई। इस बार तृणमूल की अपरूपा पोद्दार एक बार फिर इस सीट पर मैदान में हैं।

वर्ष 2004 में माकपा उम्मीदवार अनिल बसु इस सीट पर लगभग 5.97 लाख वोटों के अंतर से जीते थे। तब उनको 77.16 फीसदी वोट मिले थे जबकि दूसरे स्थान पर रहे भाजपा उम्मीदवार को 15.75 फीसदी। बसु ने वर्ष 1984 से 2004 तक सात बार यह सीट जीती थी।

वर्ष 2009 में माकपा उम्मीदवार शक्ति मोहन मल्लिक ने कांग्रेस के शंभू नाथ मल्लिक को दो लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हरा कर यह सीट जीती थी। लेकिन वर्ष 2011 में राज्य में सत्ता बदलने के बाद इलाके के वोटरों का मूड भी बदला। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की अपरूपा पोद्दार ने माकपा के शक्ति मोहन मल्लिक को लगभग साढ़े तीन लाख वोटों से हरा कर इस सीट पर कब्जा कर लिया।

प्रमुख मुद्दे : सड़कों की खस्ताहाली, नागरिक सुविधाएं और बंद होते कारखाने।
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