भोपाल से भाजपा की उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर लगातार दिग्विजय सिंह पर हमलावर रही हैं। उन्होंने अपने एक भाषण में दिग्विजय को 'आतंकवादी' तक बोल दिया था। लेकिन दिग्विजय अभी तक साध्वी प्रज्ञा पर अधिक हमलावर नहीं हुए। अपने इस रुख पर वो कहते हैं, ''मैं कभी भी अपने प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ कुछ नहीं बोलता। उन्हें मुझ पर जो आरोप लगाने हैं लगाएं, अगर वो अपने आरोपों के साथ प्रमाण भी देंगी तो मुझे और अधिक खुशी होगी।''
वो कहते हैं, ''अगर मैं आतंकवादी हूं तो मुझे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। अगर मेरे खिलाफ एक भी प्रमाण होता तो क्या मोदी जी मुझे छोड़ देते। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुझे देशद्रोही कहा। ये लोग बिना प्रमाण की बातें करना जानते हैं।'' आखिरकार आरएसएस की दिग्विजय से इतनी अधिक नाराजगी क्यों है और उनके खिलाफ साध्वी प्रज्ञा को क्यों खड़ा किया गया है। इसके जवाब में दिग्विजय कहते हैं कि आरएसएस उनसे इस वजह से चिढ़ता है क्योंकि वो सनातन हिंदू हैं।
दिग्विजय कहते हैं, ''आज हमारे धर्मगुरू शंकराचार्य जी हैं, क्या किसी भी पीठ के शंकराचार्य का समर्थन विश्व हिंदू परिषद या आरएसएस या बीजेपी को है। ये लोग दरअसल कुटिल प्रयासों के जरिए धर्म का इस्तेमाल कर मठों और मंदिरों पर कब्जा करना चाहते हैं। और यह सब सनातन धर्म की परंपराओं के विपरीत है। मैं धर्म को निजी मानता हूं उसके आधार पर वोट नहीं मांगता, धर्म को बेचता नहीं हूं।''
भाजपा अक्सर दिग्विजय की धार्मिक आस्था को ढोंग बताती रही है। इस पर दिग्विजय अपनी नर्मदा यात्रा का जिक्र करते हैं और कहते हैं कि क्या 6 महीने में 3100 किलोमीटर की पैदल परिक्रमा करना ढोंग हो सकता है। वो कहते हैं, ''मैं 30 साल से लगातार गोवर्धन जी की परिक्रमा करता रहा हूं, मेरे घर में पुश्तैनी सात मंदिर हैं जिसमें से चार में अखंड जोत जलती है। क्या ये सब ढोंग है। मुझे किसी के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है।'' दिग्विजय कहते हैं कि भाजपा उनके जैसे सनातन धर्मियों से ही घबराती है।
भाजपा कहती रही है कि दिग्विजय सिंह ने भगवा आतंकवाद और हिंदू आतंकवाद जैसे शब्द गढ़े। इस पर दिग्विजय सिंह का जवाब है कि उन्होंने कभी भी इन शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। वो कहते हैं, ''आरके सिंह ने हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल किया था जिन्हें भाजपा ने टिकट देकर सांसद बना दिया, साथ ही केंद्र में मंत्री भी बना दिया। सतेंद्र पाल सिंह जो कि महाराष्ट्र के पुलिस कमिश्नर थे। उन्होंने भगवा आतंकवाद कहा था, उन्हे भी भाजपा ने मंत्री बनाया।''
''भाजपा को ऐसे लोग पसंद आते हैं, इन लोगों के जरिए भाजपा को अपने मन की बात कहने का मौका मिल जाता है। मैंने संघी आतंकवाद कहा था जो कि मैं आज भी कहता हूं।'' संघी आतंकवाद शब्द के बारे में दिग्विजय सिंह बताते हैं, ''धर्म के नाम पर जो बम धमाके हुए इन के आरोप जिन पर लगे और जो लोग गिरफ्तार हुए, वो इसी संस्था से जुड़े हैं।'' दिग्विजय सवाल उठाते हुए कहते हैं कि अभिनव भारत संस्था किन लोगों की है।
पिछले लोकसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह की भारी मतों से जीत हुई थी, वो हंसते हुए कहते हैं कि इस बार भी वो आसान जीत दर्ज करेंगे।