1984 के आम चुनाव में राजीव गांधी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से मदद ली थी। वरिष्ठ पत्रकार रशिद किदवई ने अपनी किताब में इस बात का दावा किया है। इसे लेकर किताब में एक पूरा चैप्टर है। इसमें बताया गया है कि राजीव गांधी और तात्कालीन सरसंघचालक बालासाहेब देवरस के बीच एक सिक्रेट मीटिंग हुई थी। इसमें संघ कैडर ने बीजेपी की मौजूदगी के बावजूद कांग्रेस को समर्थन दिया था। हालांकि, भाजपा और संघ इस बात को खारिज करते हैं।
रशीद किदवई ने अपनी किताब '24 अकबर रोड: ए शॉर्ट हिस्ट्री ऑफ द पीपुल बिहाइंट द फॉल एंड द राइज़ ऑफ द कांग्रेस' में लिखा है कि इंदिरा गांधी की हत्या की सूचना मिलते ही राजीव गांधी दिल्ली पहुंचे। इंदिरा के प्रमुख सचिव पीसी एलेक्जेंडर और दूसरे करीबियों ने राजीव गांधी को बताया कि पार्टी चाहती है कि वे प्रधानमंत्री बने। एलेक्जेंडर ने कहा कि राजीव को सोनिया से अलग रखने के निर्देश भी हैं। सोनिया ने राजीव से कहा कि वो ऐसा न करें। लेकिन, राजीव गांधी को लगा कि ऐसा करना उनका कर्तव्य है।'
किताब में किदवई ने लिखा है कि राजीव गांधी का चुनाव प्रचार बहुत आक्रामक था। उनका चुनाव प्रचार सिखों के अलग राज्य के मुद्दे पर केंद्रित था। इसके पीछे छिपा एजेंडा हिंदू समुदाय में बढ़ रहे असुरक्षा की भावना का फायदा उठाना और राजीव गांधी के नेतृत्व वाले कांग्रेस को उनके एकमात्र रक्षक के तौर पर पेश करना था।' किताब का दावा है कि 25 दिनों के चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी ने कार, हेलिकॉप्टर और एयरोप्लेन से करीब 50 हजार किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा की। दरअसल, राजीव गांधी इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति की लहर के बीच हिंदुत्व की राजनीति को खंगालना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने संघ के तात्कालिक सरसंघचालक बाला साहब देवरस से मुलाकात करने का फैसला लिया।
इसकी पुष्टि कांग्रेस के पूर्व नेता बनवारीलाल पुरोहित ने भी की है। बनवारीलाल पुरोहित का दावा है कि राजीव गांधी और संघ के तात्कालीन सरसंघचालक बालासाहेब देवरास के बीच मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात में बनवारीलाल ने ही मुख्य भूमिका निभाई थी। उन्होंने साल 2007 में इस बात का खुलासा किया था।बनवारीलाल पुरोहित का कहना था कि राजीव गांधी ने उनसे पूछा की क्या वह संघ प्रमुख बालासाहब देवरस को जानते हैं। इस पर राजीव गांधी ने उसने राय लेनी चाही कि अगर संघ को राम जन्मभूमि के शिलान्यास की अनुमति दे दी जाती है तो क्या वह कांग्रेस को समर्थन देगा?