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इस बार बंगाल में बदली-बदली सी सियासी फिजा, क्या भाजपा करेगी उलटफेर?    

Tue, 07 May 2019 06:00 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ममता बनाम मोदी की जंग - फोटो : Amar Ujala
इस चुनावी मौसम में पश्चिम बंगाल में भाजपा का झंडा हर जगह नजर आ रहा है। इस राज्य में इस तरह की तस्वीरें कुछ नई हैं। कुछ साल पहले तक भाजपा के झंडे यहां नजर ही नहीं आते थे। हर तरफ टीएमसी, वामदलों और कांग्रेस के ही झंडे दिखते थे। लेकिन अब यहां के हालात बदल गए हैं। घरों पर भाजपा के झंडे खूब लहरा रहे हैं। कई सालों तक हाशिए पर रही भाजपा अब कई जगहों पर मुख्य लड़ाई में आ गई है। मौजूदा सियासी तस्वीर बता रही है कि टीएमसी की मुख्य प्रतिद्वंदी अब भाजपा है। मौजूदा लोकसभा चुनाव में ममता बनाम मोदी की जंग सुर्खियों में है। पीएम मोदी की रैलियों में खूब भीड़ उमड़ रही है। वह मंच से सीधे ममता पर वार करते हैं, अगली ही रैली में ममता की तरफ से मोदी पर तीखा वार होता है। कई बार शब्दों की मर्यादा भी तार-तार हो जाती है। बंगाल में लड़ाई पूरी तरह ममता बनाम मोदी हो गई है। चार चरणों के मतदान के दौरान भी टीएमसी और भाजपा समर्थकों में भिड़ंत की खबरें आईं। भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो की कार पर भी तड़फोड़ की गई। सुरक्षाबलों की तैनाती को लेकर भी भाजपा-टीएमसी आमने-सामने है। कुल मिलाकर सियासी तस्वीर कर रही है कि असली मुकाबला भाजपा और टीएमसी के बीच है। यहां इस बार बंपर वोटिंग भी हो रही है, ऐसे में कयास भाजपा के उलटफेर के भी लग रहे हैं। जानिए बंगाल में किस तरह टीएमसी के लिए खतरा बन रही है भाजपा और क्या हैं यहां के सियासी हालात। 
 
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BJP flag - फोटो : social media
हालांकि 2014 में मोदी लहर के बावजूद भाजपा यहां दो ही सीटें जीत पाने में कामयाब हुई थी। ये सीटें थीं दार्जिलिंग और आसनसोल। लेकिन पांच साल बाद भाजपा कई सीटों पर टीएमसी को कड़ी टक्कर दे रही है। लंबे समय तक सत्ता में रही लेफ्ट और विपक्ष में रही कांग्रेस अब पहले जैसी ताकतवर नहीं रही। टीएमसी के उभार के बाद दोनों दल कमजोर पड़ गए। जब टीएमसी की टक्कर में कोई नहीं दिख रहा था, तब भाजपा ने सभी को चौंकाते यहां की सियासत में मजबूत जगह बना ली। अब वह टीएमसी को टक्कर देने वाली प्रमुख पार्टी बन गई है। 
 
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बंगाल में भाजपा-टीएमसी की जंग - फोटो : अमर उजाला
भाजपा ने इस बार यहां 42 में से 20 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। एक तरफ जहां वामदल और कांग्रेस सुस्त पड़े हुए हैं, वहीं टीएमसी पर सत्ता विरोधी लहर के असर का खतरा है। भाजपा इसी का फायदा उठाते हुए अपने लक्ष्य को पूरा करने की जुगत में है। यहां मोदी-शाह के ताबड़तोड़ दौरों ने बता दिया कि भाजपा अपने टारगेट को लेकर किस कदर गंभीर है। पीएम मोदी और ममता के बीच हुई जुबानी जंग ने खूब सुर्खियां बटोरीं और यहां मुकाबले को दोतरफा कर दिया।

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भाजपा-सीपीएम-टीएमसी - फोटो : social Media
प. बंगाल में 10 सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा-टीएमसी के बीच सीधी टक्कर बताई जा रही है। हालांकि उत्तर और मध्य बंगाल में चौतरफा मुकाबले की संभावना दिख रही है। दक्षिण बंगाल को तृणमूल का गढ़ माना जाता है और यहां सीधी लड़ाई तृणमूल और भाजपा के बीच है।
 
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मुनमुन सेन-बाबूल सुप्रियो
2014 में भाजपा ने दार्जीलिंग और आसनसोल की सीट जीती थी। दार्जिलिंग से एसएस अहलूवालिया ने जबकि आसनसोल से बाबुल सुप्रियो ने जीत हासिल की और केंद्र में मंत्री भी बने। हालांकि इस बार भाजपा ने अहलूवालिया का टिकट काटकर राजू बिष्ट को उम्मीदवार बनाया है। आसनसोल से सुप्रियो फिर किस्मत आजमा रहे हैं। उनका मुकाबला टीएमसी की मुनमुन सेन से है। 
 
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modi and mamata
प. बंगाल में कई तृणमूल कांग्रेस नेता भी मानते हैं कि भाजपा की ताकत बढ़ रही है। वह टीएमसी को टक्कर देने वाली प्रमुख पार्टी बन गई है। पूर्व में यहां लेफ्ट की सरकार के दौरान कांग्रेस का खासा जनाधार रहा है। लेकिन नए दौर में भाजपा ने अपनी अलग जगह बनाई है। पहले अकसर टीएमसी और वामदलों के बीच भिड़त की खबरें आती थीं, आज टीएमसी-भाजपा झड़पों की खबरें आम हो गई हैं। कुल मिलाकर यहां की सियासी तस्वीर बता रही है कि भाजपा अब नंबर दो की पार्टी बन गई है। 
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नरेंद्र मोदी-अमित शाह (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
भाजपा लोकसभा चुनाव के साथ साथ आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भी मजबूत जमीन तैयार कर रही है। पिछले कुछ सालों में भाजपा का वोट प्रतिशत खासा बढ़ा है। 2011 में जहां उसे चार फीसदी वोट मिले थे, वहीं अब ये बढ़कर 17 फीसदी हो गया है। 2019 में यहां के नतीजे बताएंगे कि बंगाल में भाजपा अपने मिशन में कितना कामयाब हो पाई है।  

 
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Sunil Devdhar
भाजपा के बढ़ते प्रभाव के बीच उसके सामने मुश्किलें भी कम नहीं हैं। उसके पास यहां जमीनी स्तर पर कोई बड़ा नेता नहीं है जो भाजपा की पहचान बन सके। बाबुल सुप्रियो जरूर भाजपा की तरफ से पक्ष रखते नजर आते हैं, लेकिन बाकी किसी नेता का बड़ा जनाधार यहां नहीं है। कई नेता टीएमसी से भाजपा में आए हैं। एक तरह से प्रदेश भाजपा पूरी तरह मोदी-शाह के भरोसे ही है। प्रदेश में कोई करिश्माई नेता नहीं है। हालांकि ऐन वक्त पर यहां की कमान संघ के वरिष्ठ नेता व रणनीतिकार सुनील देवधर को दी गई। ये वही देवधर हैं जिन्होंने त्रिपुरा में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। भाजपा को उनसे फिर से करिश्मे की उम्मीद है।
 
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