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आखिरी दौर में ममता के गढ़ में भाजपा की धमक, संग्राम तो छिड़ना ही था

Thu, 16 May 2019 07:28 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला
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बंगाल में भाजपा-टीएमसी की जंग - फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव 2019 के महासंग्राम में प. बंगाल की जंग चरम पर पहुंच चुकी है। भाजपा और टीएमसी एक दूसरे पर हमलावर मुद्रा में हैं और तीखें बयानों का दौर खत्म होता नहीं दिख रहा है। इसकी जद में चुनाव आयोग भी आ गया है। कोलकाता में अमित शाह को रोड शो में हिंसा और फिर ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने के मामले ने इस कदर संग्राम छेड़ा कि चुनाव आयोग को सख्त फैसला लेना पड़ा। सवाल है कि आखिरी दौर में सियासी संग्राम इस मोड़ पर क्यों और कैसे पहुंच गया।  

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हालात ऐसे बने कि चुनाव आयोग ने यहां एक दिन पहले ही चुनाव प्रचार खत्म करने का ऐतिहासिक फरमान सुना दिया। इसके बाद से ही चुनाव आयोग ममता बनर्जी और भाजपा विरोधी नेताओं के निशाने पर है। कांग्रेस, सपा, बसपा, टीडीपी, आप सहित तमाम विपक्षी दलों ने ममता का साथ देते हुए चुनाव आयोग को पक्षपाती करार दिया है। उधर, भाजपा भी आयोग से शिकायत कर रही है। समझने की कोशिश करते हैं कि बंगाल में आखिरी दौर में क्यों संग्राम छिड़ गया। बंगाल में आखिरी दौर में नौ सीटों पर चुनाव पर होना है। ये हैं- 

दम दम
बारासात
बशीरहाट
जयनगर
मथुरापुर
डायमंड हार्बर
जादवपुर
दक्षिण कोलकाता 
उत्तरी कोलकाता


आखिरी दौर में क्यों छिड़ा संग्राम

बड़ा सवाल है कि जब छह दौर का मतदान निपट गया तो आखिरी दौर में टीएमसी-भाजपा के बीच इस कदर संग्राम क्यों छिड़ गया। इसे यूं समझते हैं। आखिरी दौर की नौ सीटों पर परंपरागत रूप से टीएमसी का ही प्रभाव रहा है। खासतौर पर जादवपुर और दक्षिण कोलकाता तो ममता बनर्जी का गढ़ है। ममता ने 1984 लोकसभा चुनाव में जादवपुर से मशहूर वाम नेता व पूर्व लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी को हराकर सनसनी फैला दी थी। वहीं, डायमंड हार्बर से ममता के भतीजे मौजूदा सांसद हैं और उम्मीदवार हैं।
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इससे पता चलता है कि इन सीटों का टीएमसी के लिए कितना महत्व है। बात 2014 चुनाव की करें तो तस्वीर कुछ इस तरह की उभरती है। इन नौ सीटों में दो सीटों पर भाजपा दूसरे नंबर पर ही थी। ये सीटें थीं उत्तर कोलकाता और दक्षिण कोलकाता। यहां टीएमसी को नुकसान की कीमत पर भाजपा को बढ़त मिली थी। 
दक्षिण कोलकाता में टीएमसी को 20.24 फीसदी वोटों का नुकसान हुआ था। 

 

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2014 का वोट शेयर

उत्तर कोलकाता में टीएमसी का वोट शेयर 35.94 फीसदी तक पहुंच गया था जबकि भाजपा का वोट प्रतिशत 25.88 फीसदी तक पहुंच गया था। यहां से भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा उम्मीदवार थे। दम दम सीट  भाजपा अतीत में जीत चुकी है। वहीं, बांग्लादेश की सीमा से लगते बशीरहाट में मुस्लिमों की करीब 50 फीसदी आबादी है। भाजपा यहां गाय की तस्करी, घुसपैठ का मुद्दा उठा रही है जिसका उसे फायदा हो सकता है। 

ममता के गढ़ में भाजपा के कदम

टीएमसी के गढ़ में उसी को चुनौती देने के लिए भाजपा ने इस बार इन नौ सीटों पर अपने सबसे मजबूत नेताओं को प्रचार के लिए उतारा। पीएम मोदी चार जगहों दम दम, बशीरहाट, मथुरापुर और डायमंड हार्बर में रैली कर रहे हैं। वहीं अमित शाह को बरासात, जयनगर और उत्तर कोलकाता में रैलियों का जिम्मा मिला। इसके अलावा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को भी कई रैलियों के लिए बुलाया गया।  

कोलकाता में अमित शाह के रोड शो में हिंसा इसी सियासी संघर्ष का परिणाम है। शाह, ममता के गढ़ में ही उन्हें चुनौती देने पहुंचे थे। ऐसे में संघर्ष होना लाजिमी ही था। इस हिंसा का नतीजा ये हुआ कि चुनाव आयोग को अभूतपूर्व फैसला लेते हुए प्रचार का समय एक दिन घटाने पर मजबूर कर दिया। अब चुनाव आयोग टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों के निशाने पर है। उधर, भाजपा भी चुनाव आयोग पर ममता पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगा रही है। 


 
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