लोकसभा चुनाव 2019 की लड़ाई में इस बार पश्चिम बंगाल बेहद चर्चा में है। यहां की कुछ सीटें ऐसी हैं जो उम्मीदवारों के चलते चर्चा में है। इन्हीं में एक सीट है आसनसोल।
कोलकाता के बाद पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा शहर है आसनसोल। यह शहर छोटा नागपुर के पठार के लगभग मध्य में प्रदेश के पश्चिमी सीमा पर स्थित है। खनिज पदार्थों केमामले में आसनसोल धनी है और उद्योग धंधे भी फल-फूल रहे हैं। यह शहर भारत के उन 11 शहरों में से एक है जो विश्व के 100 सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों की सूची में हैं।
अगर आप चाहते हैं कि आपको किसी एक राजनीतिक पार्टी के झुकाव रखने वाले के तौर पर नहीं जाना जाए तो आप आसनसोल के लोगों के पदचिह्नों पर चल सकते हैं। वे हर राजनीतिक पार्टी की बैठक में शामिल होते हैं ताकि उन्हें किसी एक दल से जोड़कर नहीं देखा जाए। पश्चिम बंगाल के महानगरीय चरित्र वाले शहर और कोयला कारोबार के प्रमुख केंद्र आसनसोल के लोग खुलकर अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं के बारे में बात करने से बचते हैं। लोगों का कहना है कि इस प्रकार की बात करने के लिए माहौल ठीक नहीं है। यहां का सियासी इतिहास हिंसा का गवाही रहा है।
2014 में बाबुल सुप्रियो जीते
आसनसोल लोकसभा सीट पर वर्तमान सांसद है भाजपा के बाबुल सुप्रियो। वह केंद्र में राज्यमंत्री भी हैं। 2014 में बाबुल ने टीएमसी की डोला सेन को 70 हजार वोटों से हराया था। इस बार यहां बाबुल का मुकाबला टीएमसी उम्मीदवार मुनमुन सेन से हैं जिन्होंने 2014 में बांकुरा से चुनाव लड़ा था। दोनों के बीच इस बार जबरदस्त जंग है। 2014 में यहां 77.76 फीसदी मतदान हुआ था। यहां कुल 1,142786 मतदाता हैं। महिला वोटरों की संख्या 509230 है।
आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र 2014 के लोकसभा चुनाव से राज्य में राजनीतिक और सांप्रदायिक रूप से अशांत क्षेत्रों में एक है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के बाबुल सुप्रियो ने अप्रत्याशित जीत दर्ज की थी। पिछले साल मार्च-अप्रैल में पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल में रामनवमी समारोह को लेकर सांप्रदायिक दंगा हुआ था। इस क्षेत्र में करीब 70 फीसद हिंदू और 28 फीसद मुसलमान हैं।