फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बंगाल का बवालः ममता बनर्जी की जमीन और मजबूत होती भाजपा

Wed, 15 May 2019 10:05 PM IST
Amit Digital अमित शर्मा, नई दिल्ली
विज्ञापन
अमित शाह - फोटो : ANI
विज्ञापन

पश्चिम बंगाल में अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई जबरदस्त हिंसा के लिए बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर जनता को डराने के लिए टीएमसी नेताओं ने ये हमले कराए हैं। अगर केंद्रीय बलों के जवान न होते तो मंगलवार को उनका बचना भी संभव न होता। जबकि टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कुछ वीडियो शेयर कर आरोप लगाया है कि बीजेपी के बाहर से आए समर्थकों ने बंगाल में हिंसा को अंजाम दिया है।

विज्ञापन


इन आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच जहां भाजपा इस बार सत्ता तक पहुंचने के लिए पश्चिम बंगाल से ढेरों उम्मीदें पाले बैठी है, वहीं भाजपा की बढ़ती ताकत ममता बनर्जी के लिए इस चुनाव के साथ-साथ भविष्य में भी बड़ा खतरा बन सकती है। यही वजह है कि दोनों ही दलों ने बंगाल में अपना सब कुछ झोंक रखा है। 

भाजपा का बड़ा सियासी दांव

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के जातीय समीकरणों के गठबंधन से भाजपा को कड़ी टक्कर मिल रही है। पिछले चुनाव में यूपी की 80 में से 73 सीटों को हासिल करने वाले एनडीए को यहां कितने पर सिमटना पड़ जाएगा, कहना मुश्किल है। यूपी की इस संभावित कमी की भरपाई के लिए बीजेपी ने जिन राज्यों से उम्मीदें पालीं वे पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और पूर्वोत्तर के राज्य थे।
विज्ञापन


पार्टी सूत्रों के मुताबिक पूर्वोत्तर में बीजेपी को अच्छी सफलता मिलती दिख रही है, लेकिन नवीन पटनायक की जमीन उड़ीसा में बीजेपी बड़ी सेंध लगाने में नाकाम रही है। यही कारण है कि अब बीजेपी की सारी उम्मीदें पश्चिम बंगाल पर केंद्रित हो गई हैं।

भाजपा के केंद्रीय नेता लगातार पश्चिम बंगाल में डेरा डाले हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह सहित बीजेपी के फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ लगातार वहां पर प्रचार कर रहे हैं। पूरी रणनीति के तहत पार्टी यहां वोटों के विभाजन की कोशिश कर रही है। उसकी रैलियों में जय श्रीराम का नारा केवल पश्चिम बंगाल में ही सुनने को मिल रहा है तो यह बेवजह नहीं है। उनकी सभाओं में उमड़ रही भीड़ ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा रही है।   
 

विज्ञापन

कुल 42 लोकसभा सीटों वाले पश्चिम बंगाल से भाजपा की उम्मीदें उसी समय बढ़ गईं थीं जब उसने त्रिपुरा में वामपंथी शासन को उखाड़ फेंकने में सफलता पाई थी। पश्चिम बंगाल में वामदलों के कमजोर होने से भाजपा को उस रिक्त स्थान को भरने की इच्छा है। पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में उसे मिली शानदार सफलता ने बीजेपी के उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं। बीजेपी नेता पश्चिम बंगाल में 42 में से 23 सीटों को जीतने का दावा करने लगे हैं।

अमित शाह का दावा तो इससे भी ज्यादा सीटों को जीतने का है, लेकिन अगर वह बड़ी जीत न भी हासिल कर सके तो भी आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए वह टीएमसी के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभरी है। यही कारण है कि टीएमसी भी अपना गढ़ बनाए रखने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। दोनों पक्षों की यह कोशिश राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे निकलकर हिंसा तक पहुंच चुकी है।  

सातवें चरण में पश्चिम बंगाल की नौ सीटों पर मतदान

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में 19 मई को सात राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की कुल 59 सीटों पर मतदान होना है। इसमें पंजाब और उत्तर प्रदेश की तेरह-तेरह सीटों के अलावा पश्चिम बंगाल की नौ, मध्य प्रदेश और बिहार की आठ-आठ, हिमाचल प्रदेश की चार, झारखंड की तीन और एक सीट चंडीगढ़़ की सीट पर मतदान होना है। 

हासिल करेंगे अप्रत्याशित जीत- बीजेपी

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुदेश वर्मा का कहना है कि पूरे देश में पश्चिम बंगाल ही एक मात्र राज्य है जहां हिंसा हो रही है जबकि दूसरे राज्यों में जहां कांग्रेस, टीडीपी या अन्य दल शासन में हैं, वहां भी हिंसा नहीं हो रही है। उनका आरोप है कि टीएमसी नेताओं की शह पर यह हो रहा है। इसके जरिय़े वे बीजेपी को आगे बढ़ने से रोकना चाहते हैं। बीजेपी नेता ने कहा कि पश्चिम बंगाल से हमारी उम्मीदें केवल 23 सीटों की थी। लेकिन जनता का प्यार देखकर यह तय हो गया है कि यह आंकड़ा इससे भी आगे जाकर रुकेगा।  
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें