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साध्वी प्रज्ञा के बयान से भाजपा ने झाड़ा पल्ला, हेमंत करकरे को बताया शहीद

Fri, 19 Apr 2019 07:33 PM IST
Prabudhh Jain चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भोपाल से भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के हेमंत करकरे पर दिए बयान को लेकर हंगामा मच गया है। अब भारतीय जनता पार्टी ने इस बयान से पल्ला झाड़ लिया है। पार्टी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि हेमंत करकरे ने आतंकवादियों से लड़ते हुए अपनी जान गंवाई है और पार्टी हमेशा से यह मानती है कि वे देश के शहीद हैं। पार्टी ने यह भी कहा है कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का बयान उनका निजी विचार है। पार्टी के मुताबिक साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का बयान उन्हें वर्षों तक मिली शारिरिक और मानसिक प्रताड़ना के कारण उत्पन्न हुआ हो सकता है। 

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दरअसल, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने अपने एक बयान में यह कहकर भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर दी थी कि हेमंत करकरे की मौत उनके श्राप देने के कारण हुई थी। क्योंकि एक राजनैतिक इशारे पर करकरे ने उन्हें कई वर्षों तक शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया था। साध्वी को यह प्रताड़ना उन्हें तब दी गई थी जब मालेगांव ब्लास्ट के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। 

कांग्रेस ने कहा-माफी मांगें पीएम
कांग्रेस ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग करते हुए कहा कि वह प्रज्ञा के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करें। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह आरोप भी लगाया कि प्रज्ञा के 'अक्षम्य बयान' से 'अजमल कसाब के मित्र भाजपा' का 'देशद्रोही चेहरा' सामने आ गया है।
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सुरजेवाला ने कहा, 'आखिरकार यह साबित हो ही गया कि पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब के दोस्त भाजपाई निकले। भाजपा ने शहीद हेमंत करकरे को देशद्रोही घोषित करने का नाकाबिले माफी जुर्म किया है।' उन्होंने कहा, ' जिन्होंने आतंकवादियों से लड़ते-लड़ते अपने जीवन की कुर्बानी दी डाली और आज उन्हें ही प्रज्ञा ठाकुर ने देशद्रोही घोषित कर डाला। भाजपा की ओर से इस शहीद का तिरस्कार करने की हद तब हो गई जब करकरे के पूरे वंश के नाश की बात की गई।' उन्होंने सवाल किया, 'क्या भाजपा अशोक चक्र विजेता करकरे के पूरे परिवार का सफाया करना चाहती है?'

प्रज्ञा मालेगांव विस्फोट मामले में आरोपी हैं। इस मामले की जांच करकरे के नेतृत्व में हुई थी। गौरतलब है कि 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने मुंबई के कई स्थानों पर हमले किए थे। उसी दौरान करकरे और मुंबई पुलिस के कुछ अन्य अधिकारी शहीद हुए थे।
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(इनपुट- डिजिटल ब्यूरो)

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