चुनाव पर नजर रखने वाली बहुत सी एजेंसियों के अनुसार 2024 दुनियाभर के मतदाताओं का साल है। इस वर्ष संयुक्त रूप से 44.2 खरब सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वाले भारत और अमेरिका सहित करीब 40 देशों के करीब 320 करोड़ लोग इस चुनावी महाकुंभ में मतदान के रूप में आहुति देंगे।
अगर भारत में राज्य और स्थानीय निकायों के चुनावों को भी इसमें शामिल कर लिया जाए तो करीब 76 देशों में मतदान होगा। यह भी कह सकते हैं कि दुनिया में हर दूसरा शख्स मतदाता होगा। एजेंसियों का मानना है कि एक साल में पहले कभी इतने अधिक लोगों ने मतदान नहीं किया।
बहुसंकट का भी समय
फ्रीडम हाउस की ओर से किए गए फ्रीडम इन द वर्ल्ड मूल्यांकन के अनुसार, यह पॉलीक्राइसिस यानी बहुसंकट का भी समय है। यानी कई विनाशकारी घटनाओं का एक साथ लगातार घटित होना। जलवायु आपातकाल ने हर देश के सामने खतरा पैदा कर दिया है। विश्व अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है। कई चुनावी देश गरीबी के बीच महामारी से लड़ते हुए खुद को उबारने का संघर्ष कर रहे हैं।
दुनिया कई युद्धों से भी जूझ रही है। यह ऐसा भी समय है जब विश्व में सबसे अधिक युवा जनसंख्या है। इस लिहाज से 2024 वह महत्वपूर्ण मोड़ है जब लोगों की ताकत लोकतंत्र की कसौटी पर परखी जाएगी। इसमें शक नहीं है कि लोकतंत्र को अब भी प्राथमिकता दी जाती है। यह बात फ्रीडम इन द वर्ल्ड्र मूल्यांकन से भी स्पष्ट होती है।
86% लोग लोकतांत्रिक देश के पक्ष में
ओपन सोसाइटी फाउंडेशन ने ओपन सोसाइटी बैरोमीटर शीर्षक से किए गए सर्वेक्षण में पाया कि औसतन 86 फीसदी लोग लोकतांत्रिक देश में रहना चाहते हैं। लोग अभी भी आम चुनौतियों के समाधान में लोकतंत्र की क्षमता पर विश्वास करते हैं।
शीर्ष सदनों को नजरअंदाज करने वाले मजबूत नेताओं का समर्थन
सर्वे में पाया कि 56 वर्ष और उससे अधिक आयु के एक चौथाई से अधिक लोगों ने मजबूत नेताओं का समर्थन किया जो शीर्ष सदनों और चुनावों को नजरअंदाज करते हैं। 36-55 आयु वर्ग में यह आंकड़ा 32 फीसदी था और 18-35 आयु वर्ग में यह 35 फीसदी था।
84% लोग चाहते हैं मजबूत नेता काे मिले नेतृत्व
इन निष्कर्षों से पता चलता है यदि पूर्ण लोकतांत्रिक देशों में लोकप्रिय और मजबूत नेता लोगों की पहली पसंद बनेंगे तो इससे लोकतंत्र की जड़ें और गहरी होंगी। बहुसंकट के इस दौर में 84 फीसदी से अधिक लोग अपने देश में लोकतंत्र के साथ एक मजबूत नेता का नेतृत्व चाहते हैं।