ऐसे क्षेत्रों में केवल जरूरी सामान बेचने की इजाजत मिलती है। इसमें कुछ भाग ऐसा भी हो सकता है कि जिला प्रशासन वहां किसी भी तरह की कोई छूट ही न दे। जिला स्वास्थ्य अधिकारी इस बाबत रिपोर्ट देता है कि वहां पूर्णत: लॉकडाउन रहे या जरूरी साजो-सामान लेने की इजाजत दी जाए।
ये फैसला कोरोना संक्रमण के केसों की बढ़ती हुई संख्या को ध्यान में रखकर लिया जाता है। कई बार यह भी हो सकता है कि प्रशासन उस इलाके में होम डिलिवरी की सुविधा प्रदान कर दे। लोगों को घर से बाहर निकलने की मंजूरी ही न मिले।
400 मीटर के दायरे में कंटेनमेंट जोन बनाया जाता है
कंटेनमेंट जोन बनाने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अलग अलग मापदंड अपनाए जाते हैं। जैसे किसी शहर का कोई एक मोहल्ला है और उसमें किसी एक व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई है तो उस स्थिति में वहां पर 400 मीटर के दायरे वाले इलाके को कंटेनमेंट घोषित किया जाता है। यहां पर भी केसों की संख्या और लोगों की स्क्रीनिंग रिपोर्ट आदि मायने रखती है।
इसके आधार पर कंटेनमेंट जोन का दायरा 400 मीटर से ज्यादा भी किया जा सकता है। ग्रामीण इलाकों में ऐसा नहीं होता। वहां पर कोई विकल्प नहीं है, बशर्ते पूरे गांव को ही कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया जाए। इस हालत में किसी को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाता। यहां पर भी प्रशासन अपने हिसाब से जरूरी सेवाएं लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था करता है।