देश में जारी लॉकडाउन की वजह से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विभिन्न एयरलाइंस के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विमान खड़े हैं। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने भारतीय हवाई क्षेत्र में केवल कार्गो और विशेष उड़ानें को उड़ान भरने की इजाजत दी है। बाकी सभी की सेवाएं निरस्त हैं।
जिसकी वजह से 600 से ज्यादा वाणिज्यिक विमान हवाईअड्डे पर खड़े हैं। वैश्विक हवाईअड्डों के समूह ने गुरुवार को कहा कि विमानों की पार्किंग लिए 'पर्याप्त स्थान' ढूंढना एयरलाइंस के लिए मुख्य चुनौती बन गया है। लॉकडाउन की वजह से 14 अप्रैल तक के लिए सभी अतंरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ान पर रोक लगी हुई है।
विमानों को नॉन-ऑपरेशनल रनवे पर भी पार्क किया जा रहा है। एयरपोर्ट काउंसिल इंटरनेशनल (एसीआई) के अनुसार, एयरपोर्ट ऑपरेटरों के लिए मुख्य चुनौती इन विमानों के लिए पर्याप्त पार्किंग के लिए स्थान उपलब्ध कराना है। एशिया एसीआई की प्रवक्ता सामंथा सोलोमन ने कहा, 'सबसे पहले विमानों को पार्क करने के लिए हवाईअड्डे रिमोट स्टैंड का उपयोग करने की कोशिश करेंगे। इसके बाद मेंटेनेंस (रखरखाव) हैंगर और रिसॉर्ट टैक्सीवे की बारी आएगी।'
एसीआई 176 देशों में 1,953 हवाई अड्डों का संचालन करने वाले 641 सदस्यों को सेवा प्रदान करता है। एसीआई में एशिया-प्रशांत के 113 सदस्य हैं, जिसमें भारत सहित 49 देशों और क्षेत्रों में 602 हवाई अड्डे आते हैं। सामंथा ने कहा, 'टैक्सीवे पर विमान को पार्क करना तब तक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा नहीं करता है जबतक कि उसका आकार टैक्सीवे के आकार से बड़ा नहीं होता।'
भारत में लगभग 650 विमानों के साथ आठ प्रमुख एयरलाइनें हैं, जिसमें चौड़े जंबो 747-400एस, फ्यूल गेजलर बोइंग 777, ड्रीमलाइनर (बी787), छोटे आकार वाले ए320, क्षेत्रीय जेट विमान बी737 एटीआर और बॉम्बारडियर क्यू400 शामिल हैं। पिछले हफ्ते, एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट एयरपोर्ट ऑपरेटर्स (एपीएओ) के एक अधिकारी ने कहा था कि अभूतपूर्व स्थिति को देखते हुए, दिल्ली हवाईअड्डे ने टैक्सीवे पर कुछ विमानों को खड़ा करने की अनुमति दी है।