फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यह तस्वीर नहीं एक सच्ची कहानी है

Mon, 18 May 2020 04:09 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
यह तस्वीर एक मजबूर पिता की है जो अपनी दिव्यांग बेटी को बोरे में डालकर ले जाने को मजबूर है। - फोटो : PTI
विज्ञापन

यह महज तस्वीर नहीं है, बल्कि कहानी है। सच्ची कहानी, जिसके पात्र और घटनाएं काल्पनिक नहीं हैं। यह एक अंतहीन कहानी है, जो शायद आगे वाले कई दशकों तक याद रखी जाएगी। इतिहास चाहकर भी इसे भुला नहीं पाएगा। आप इसे मजबूरी, पलायन, जुगाड़ या गरीबी की संज्ञा भी दे सकते हैं। लेकिन इससे सच नहीं बदल पाएगा। खबरों के किसी भी माध्यम को देखने पर आपको देशभर में मजदूरों के पलायन की सूचनाएं मिलेंगी।

विज्ञापन

 


लेकिन यह समझने वाले लोग कितने हैं कि यह केवल मजदूर नहीं, आधुनिक समाज की नींव भी हैं, जिनके दमपर शहर और तथाकथित संपन्नता इठलाती है। पिछले 50 दिनों में यह नींव दरक चुकी है और दरारों के आरपार स्पष्ट दिखाई देने लगा है। उस पार जो दिख रहा है, उसे अब भी शायद समझा नहीं जा रहा है। हमारे देश में महामारियां, अकाल और भुखमरी, दंगे-फसाद और कुदरती आपदाएं देखीं हैं। लेकिन यह नींव उन्हें झेल गई थी। लेकिन एक वायरस ने पूरी दुनिया को हिला दिया है।

यह भी पढ़ें- लॉकडाउन: दो बच्चों को कंधे पर लटकाए पिता ने तय की 160 किमी यात्रा

विज्ञापन



कोई ऐसा देश नहीं है जो सीना ठोककर कह सके कि उस पर कोरोना का कोई असर नहीं हुआ है। हमारा देश भी अछूता नहीं है। यह तस्वीर इसका पुख्ता और झकझोर देने वाला प्रमाण है। इस मर्म को शब्दों में नहीं ढाला जा सकता है।

विज्ञापन

ये तस्वीरें भी उसी कड़ी का हिस्सा हैं जो इन दिनों हम सभी को झकझोर रही हैं।







सभी तस्वीरें पीटीआई की हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें