यूक्रेन और रूस में चल रहे युद्ध के बीच हजारों भारतीय छात्र यूक्रेन और पड़ोसी देशों में फंसे हुए हैं। उन्हें सुरक्षित भारत लाने के लिए भारत सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी सिलसिले में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, हरदीप सिंह पुरी, किरेन रिजिजू और वीके सिंह यूक्रेन के पड़ोसी देश पहुंच गए। सरकार ने सभी छात्रों को सकुशल भारत लाने के लिए प्रयास तेज कर दिया है। हालांकि इस बीच भारतीय नागरिक छात्रों को वापस लाने के केंद्र सरकार के प्रयासों से संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
लोकल सर्कल्स के ताजा सर्वे में सामने आया है कि 62 फीसदी भारतीय रूस-यूक्रेन समस्या को संभालने के भारत सरकार के तरीके से संतुष्ट हैं। यही सवाल जब 26 फरवरी को लोगों से किया गया तो 73 फीसदी लोगों का कहना था कि वे संकट को संभालने के भारत के तरीके का समर्थन करते हैं। सर्वे में यह जानने की भी कोशिश की गई कि लोग रूस पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों पर क्या सोचते हैं। इस सर्वे में देश के 351 जिलों से 29 हजार प्रतिक्रियाएं मिलीं। इसमें 62 फीसदी पुरुष जबकि 38 प्रतिशत महिलाएं थीं।
सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि रूस-यूक्रेन संकट पर भारत का रुख क्या होना चाहिए। इस पर 62 फीसदी लोगों ने कहा कि भारत जैसा कर रहा है, वैसा करते रहे। (यूएन में रूस के खिलाफ पाबंदियों पर वोट न करें। जबकि 33 फीसदी लोगों का मत है कि यूक्रेन को सपोर्ट करें, यूएन में वोट कर रूस पर पाबंदियों का समर्थन करें। वहीं पांच फीसदी लोगों का कहना है कि रूस के खिलाफ अभी वोट न करें पर आगे चलकर रूस को समर्थन देना बंद करें।
सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि क्या रूस पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों का आप समर्थन करते हैं। इस पर 28 फीसदी ने हामी भरी। जबकि 22 फीसदी ने कहा अभी और प्रतिबंध रूस पर भी लगने चाहिए। जबकि 34 प्रतिशत ने कहा कि रूस पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए।