फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लॉकडाउन में लिया लोन बच्चों को कहीं बंधुआ मजदूरी में न ढकेल दे

Mon, 29 Jun 2020 05:09 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
विज्ञापन

कोरोना महामारी से निपटने के लिए लगाए गए लॉकडाउन ने समाज के हर तबके को परेशान किया है, लेकिन उन किशोरों के लिए ज्यादा कष्टकारी है, जो अपने-अपने घरों से कामकाज या अन्य कारणों से भाग कर आए हैं। एनजीओ की यही चिंता है कि लॉकडाउन के दौरान गुजारे कि लिया गया कर्ज न चुका पाने के कारण उन्हें कहीं बंधुआ मजदूरी के लिए मजबूर न कर दे।

विज्ञापन


बिहार से भाग कर आया 15 वर्षीय एक किशोर दिल्ली की गलियों में रहता है। उसकी निजता के संरक्षण के लिए उसका नाम नहीं लिखा जा रहा है। वह जीवन यापन के लिए कबाड़ बेचता है। जीवन ढर्रे पर चल रहा था, लेकिन लॉकडाउन ने अचानक से उथल-पुथल मचा दी।

लॉकडाउन से पहले उसकी रोजाना की कमाई 200 रुपये थी, जो लॉकडाउन के बाद 15 से 20 रुपये रह गई। उसे मजबूर होकर उधार लेना पड़ा, लेकिन अब उसके पास चुकाने के लिए पैसे नहीं हैं। उस किशोर को नहीं पता कि आगे क्या होने वाला है, लेकिन वह एकसाथ अपनी कई समस्याएं गिना देता है।
विज्ञापन


गैरसरकारी संगठन सेव द चिल्ड्रन के अनुमान के मुताबिक, करीब 20 लाख बच्चे देश की सड़कों पर जीवन गुजार रहे हैं। वो हाशिये पर रहने के लिए भी हाथ-पैर मार रहे हैं। एनजीओ का कहना है कि अब उनका शोषण किया जा सकता है, क्योंकि वह कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें