मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को एक बार फिर कहा कि अदालती कार्यवाही की नई अपनाई गई लाइव स्ट्रीमिंग पद्धति के कुछ प्रतिकूल पहलू हैं। सीजेआई ने कहा कि जजों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है, क्योंकि उनके द्वारा कहा गया हर शब्द सोशल मीडिया के युग में सार्वजनिक दायरे में है।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कटक में डिजिटलीकरण, पेपरलेस कोर्ट और ई-पहल पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा, यूट्यूब पर बहुत सारी मजेदार चीजें चल रही हैं, जिन्हें हमें नियंत्रित करने की जरूरत है क्योंकि यह गंभीर चीजें हैं। कोर्ट में जो होता है वह बेहद गंभीर मामला है। हम जो लाइव स्ट्रीमिंग कर रहे हैं उसका एक दूसरा पहलू भी है। जज के रूप में हमें प्रशिक्षित होने की जरूरत है क्योंकि हम जो भी शब्द अदालत में कहते हैं वह सार्वजनिक होते हैं। हमें पता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रतिकूल पहलू भी हैं। उदाहरण के लिए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को हमें यह बताने की अनुमति देना बहुत मुश्किल होगा कि एक आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के बाद क्या सजा दी जाए।