फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

परीक्षा पे चर्चा: बच्चों से बोले पीएम मोदी- नॉलेज के पीछे दौड़िए, मार्क्स दौड़कर आएंगे

Tue, 29 Jan 2019 11:46 AM IST
kapil kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
नरेंद्र मोदी - फोटो : Twitter
विज्ञापन

लाइव अपडेट

12:58 PM, 29-Jan-2019

बच्चों, शिक्षकों व मां –बाप किसी को भी डिप्रेशन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर समय रहते बच्चों से सही तरह से बातचीत करेंगे, उनके साथ समय बिताएंगे तो ऐसी स्थिति से आसानी निपटा जा सकता है।

12:54 PM, 29-Jan-2019

अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों के डिप्रेशन को हल्के में नहीं लेना चाहिए। डिप्रेशन या स्ट्रेस से बचने के लिए काउंसिलिंग से भी संकोच नहीं करना चाहिए, बच्चों के साथ सही तरह से बात करने वाले एक्सपर्ट से संपर्क करना चाहिए।

12:41 PM, 29-Jan-2019

आप अपने रिकॉर्ड से ‘कॉम्पिटिशन’ कीजिए और हमेशा अपने रिकॉर्ड ब्रेक कीजिए। इससे आप कभी निराश नहीं होंगे और तनाव में नहीं रहेंगे। 

विज्ञापन
12:27 PM, 29-Jan-2019

समय को बर्बाद करना हमारी आदत बन गई है। बच्चों की बच्चों से तुलना करना ठीक नहीं है। तुलना से बच्चों पर बहुत फर्क पड़ता है। बच्चों को प्रोत्साहित करना जरूरी है। अभिभावकों का सकारात्मक रवैया, बच्चों की जिंदगी की बहुत बड़ी ताकत बन जाता है। आप नॉलेज के पीछे दौड़िए, मार्क्स दौड़कर आएंगे।

12:19 PM, 29-Jan-2019

कसौटी बुरी नहीं होती, हम उसके साथ किस प्रकार के साथ डील करते हैं उस पर निर्भर करता है। मेरा तो सिद्धांत है कि कसौटी कसती है, कसौटी कोसने के लिए नहीं होती है। एग्जाम को अगर हम अवसर मानें तो इसमें मजा आएगा।

विज्ञापन
12:18 PM, 29-Jan-2019

जब मन में अपनेपन का भाव पैदा हो जाता है तो फिर शरीर में ऊर्जा अपने आप आती है और थकान कभी घर का दरवाजा नहीं देखती है। मेरे लिए भी देश के सवा सौ करोड़ देशवासी मेरा परिवार है। जो सफल लोग होते हैं, उन पर समय का दबाव नहीं होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उन्होंने अपने समय की कीमत समझी होती है।

12:12 PM, 29-Jan-2019

जब मन में अपनेपन का भाव पैदा हो जाता है तो फिर शरीर में ऊर्जा अपने आप आती है और थकान कभी घर का दरवाजा नहीं देखती है। मेरे लिए भी देश के सवा सौ करोड़ देशवासी मेरा परिवार है। सफल लोगों को समय का दबाव नहीं होता।

12:09 PM, 29-Jan-2019

निशान चूक जाए तो माफ हो सकता हैं लेकिन निशान नीचा हो तो कोई माफी नहीं, लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो पहुंच में हो लेकिन पकड़ में न हो। मैं सवा सौ करोड़ देशवासियों की चिंता करता हूं। अपनो के लिए सोचना जरूरी है।

12:04 PM, 29-Jan-2019

लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जो पहुंच में तो हो, पर पकड़ में न हो। जब हमारा लक्ष्य पकड़ में आएगा तो उसी से हमें नए लक्ष्य की प्रेरणा मिलेगी। लक्ष्य हमारे सामर्थ्य के साथ जुड़ा होना चाहिए और अपने सपनों की ओर ले जाने वाला होना चाहिए। हर बच्चे की सकारात्मक चीजों को समझना आवश्यक है।

12:03 PM, 29-Jan-2019

बच्चों की गलतियों को प्यार से सुधारें। हम बच्चों को तकनीक से हटा नहीं सकते हैं। उन्हें इसका सही फायदा बताना चाहिए। दबाव न ले इससे डर पैदा होता है। खुले मैदान में खेलना ये जीवन का हिस्सा होना चाहिये और बच्चो को तकनीक की सही दिशा में ले जाना चाहिये।

11:58 AM, 29-Jan-2019

ऑनलाइन गेम समस्या भी है और समाधान भी। प्रौद्योगिकी को मन के विस्तार और नवाचार के साधन के रूप में आगे बढ़ाना चाहिए। तकनीक का आज बहुत बड़ा योगदान है। बच्चों को तकनीक का सही इस्तेमाल बताना चाहिए। तकनीक का उपयोग हमारे विस्तार के लिए, हमारे सामर्थ्य में बढ़ोतरी के लिए होना चाहिए। हंसना, खेलना जीवन के लिए बहुत जरूरी है। एकाध परीक्षा में कुछ हो जाए तो जिंदगी ठहर नहीं जाती है। बच्चों को हमेशा डांटना रहना ठीक नहीं है। 

11:51 AM, 29-Jan-2019

अपेक्षाओं के बोझ में हमें दबना नहीं चाहिए। अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अपने आपको सज करना चाहिए। लोग कहते हैं मोदी ने बहुत आकांक्षा जगा दिए हैं, मैं तो चाहता हूं कि सवा सौ करोड़ देशवासियों के सवा सौ करोड़ महत्वकांक्षा होनी चाहिए। हमें उन आकांक्षाओं को उजागर करना चाहिए देश तभी चलता है। अपेक्षाओं के बोझ में दबना नहीं चाहिए। हमें अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अपने आपको सिद्ध करना चाहिए।

11:50 AM, 29-Jan-2019

परीक्षा से बाहर भी बहुत बड़ी दुनिया है। इसे कक्षा की परीक्षा ही समझें जिंदगी की न समझें। अभी नहीं तो कभी नहीं ऐसा मत सोचिए। सोशल स्टेटस के लिए मां बाप बच्चे पर दबाव डालते हैं। रिपोर्ट कार्ड परिवार का विजिटिंग कार्ड नहीं बनना चाहिए।

11:46 AM, 29-Jan-2019

निराशा में डूबा समाज, परिवार या व्यक्ति किसी का भला नहीं कर सकता है, आशा और अपेक्षा उर्ध्व गति के लिए अनिवार्य होती है। अपेक्षा आवशयक होती है। अपेक्षा के कारण ही हमे कुछ ज्यादा करने की इच्छा होती है।

11:45 AM, 29-Jan-2019

पीएम ने कहा, जिंदगी का मतलब ठहराव नहीं है, जिंदगी का मतलब ही होता है गति। अगर हम अपने आपको कसौटी के तराजू पर झौकेंगे नहीं तो जिंदगी में ठहराव आ जायेगा। जिंदगी का मतलब ही होता है गति, जिंदगी का मतलब ही होता है सपने।

11:44 AM, 29-Jan-2019

परीक्षा पे चर्चा: बच्चों से बोले पीएम मोदी- नॉलेज के पीछे दौड़िए, मार्क्स दौड़कर आएंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ परीक्षा पे चर्चा कर रहे हैं। स्कूलों में इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जा रहा है। पीएम ने कहा कि मेरे लिए ये कार्यक्रम किसी को उपदेश देने के लिए नहीं है। मैं यहां आपके बीच खुद को अपने जैसा, आपके जैसा और आपके स्थिति जैसा जीना चाहता हूं, जैसा आप जीते है। पीएम ने एक कविता को याद करते हुए कहा कि कुछ खिलौने के टूटने से बचपन नहीं मरता।

और पढ़ें...
विज्ञापन
MORE
AU ऐप में पढ़ें