तमिलनाडु के तटीय इलाकों में वरदा तूफान की दस्तक ने भारी तबाही मचाई है। तटीय जिलों में भूस्खलन के कारण 10 लोगों की मौत हो गई। बारिश के साथ लगभग 110-120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली हवा के कारण सैकड़ों पेड़ उखड़ गए, परिवहन एवं वायु सेवा के साथ ही बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। आम जनजीवन बुरी तरह से तहस-नहस हो गया है। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के निचले इलाकों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
चेन्नई में दो दशक बाद इतना खतरनाक तूफान आया है। इससे पहले 1994 में चेन्नई में ऐसा तूफान आया था। तेज बारिश और हवा के साथ वरदा ने भारी तबाही मचाई। तेज हवा के कारण कई घरों की छत तक उड़ गईं। कई कारें भी पलटी देखी गईं।
तिरुवल्लूर जिले में दो लोगों की मौत हो गई। आंध्र प्रदेश में भी दो मछुआरे गायब बताए गए हैं। हालांकि देर शाम तक हवा की रफ्तार काफी कम हो गई। मुख्यमंत्री ओ. पन्नीर सेल्वम ने चेन्नई, तिरुवल्लूर और कांचीपुरम जिलों के लोगों से अपील की है कि आधिकारिक घोषणा से पहले वे घर से न निकलें।
आंध्र प्रदेश में भी 225 निचले क्षेत्रों से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। श्रीहरिकोटा स्थित इसरो के सतीश धवन स्पेस सेंटर के दो रॉकेट लांच पैड को तूफान से कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। इसकी हिफाजत के लिए वैज्ञानिकों ने पर्याप्त इंतजाम किए थे।
LIVE UPDATE:
उत्तरी तमिलनाडु और दक्षिण कर्नाटका में अगले 12 घंटों तक बारिश की संभावन जताई गई है: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन
सुल्लुरपेटा (आंध्र प्रदेश): वरदा से प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ की टीम द्वारा राहत और बचाव कार्य जारी है।
परिस्थिति पर नजर रखी जा रही है। हम जितना कर सकते हैं उतना परिस्थिति को सामान्य करने की कोशिश की जा रही है: आर के पंचनंदा, डीजी एनडीआरएफ
जरूरत पड़ने पर नौसेना और वायुसेना की भी मदद लेने की योजना
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भारी बारिश, तेज हवा और खराब विजिबिलिटी के कारण चेन्नई एयरपोर्ट पर चेतावनी (नोटम) जारी कर दी गई, जिसके चलते सोमवार को वहां से विमानों की कोई आवाजाही नहीं हुई। यहां आने वाले 25 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विमानों का रूट बदलकर हैदराबाद और बंगलूरू कर दिया गया। दक्षिण रेलवे ने चेन्नई की कई रेल सेवाएं रद्द कर दी हैं।
दक्षिण मध्य रेलवे की कई रेल सेवाएं भी रद्द कर दी गई हैं। आपदा से सतर्क केंद्र लगातार हालात की समीक्षा कर रहा है। गृह मंत्रालय ने इन दो राज्यों में राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की 15 टीमें भेजी हैं। अन्य 7 टीमों को भी तैयार रहने को कहा गया है।
तमिलनाडु के कलपक्कम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुरक्षा के लिए जरूरी ऐहतियाती कदम उठाए गए हैं। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर उन्हें सभी जरूरी मदद देने का आश्वासन दिया है। जरूरत पड़ने पर नौसेना और वायुसेना की भी मदद लेने की योजना है।
राहत अभियान
10432 लोगों को एनडीआरएफ की टीमों ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
296 राहत शिविर बनाए गए
11857 खाने के पैकेट बांटे गए
3384 पेड़ गिरे
30 बिजली ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए, सैकड़ों होर्डिंग गिरे, संचार सेवाएं भी कई जगह ध्वस्त हुईं।
जानिए कैसे हुआ तूफानों का नामकरण?
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तूफानों का रिकॉर्ड सन 1851 से रखा जाना शुरू किया गया। सन 1950 से पहले तक तूफानों का नाम 1946 (ए), 1946 (बी) आदि रखा जाता था। वर्ष 1950 के बाद तूफानों के नाम महिलाओं के नाम पर और वर्ष 1979 से पुरुषों के नाम पर भी रखे जाने लगे।
भारतीय उपमहाद्वीप में नामकरण
भारतीय उप महाद्वीप में नामकरण की आवश्यकता सन 1999 के एक त्रासद तूफान के बाद महसूस हुई। क्षेत्र के आठ देशों बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका, ओमान और थाईलैंड ने मिलकर एक समिति गठित की।
इन आठ देशों ने आठ-आठ नाम सुझाए जिससे कुल 64 नामों की सूची तैयार की गई। नामकरण के लिए छह सेट तैयार किए गए जिन्हें रोटेशन के आधार पर अपनाया जाता है। यानी जिस सेट का नाम एक बार दे दिया गया हो उसका नाम फिर छह साल बाद आएगा।
इस बार पाकिस्तान द्वारा दिए गए नाम की बारी थी। वरदा इस सूची में 46वें स्थान पर है। भारत के सुझाए नाम अग्नि, आकाश, बिजली, जल, लहर, मेघ, सागर और वायु हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में आने वाले तूफानों का नाम दिल्ली मौसम विभाग देता है।