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सिगरेट की तरह गंगाजल के लिए भी हो चेतावनी, डिसप्ले बोर्ड लगाकर बताएं पीने-नहाने लायक नहीं है पानी

Sat, 28 Jul 2018 12:52 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा का पानी पीने और नहाने लायक न होने की पुष्टि पर एनजीटी ने नाराजगी जताई है। एनजीटी ने कहा कि यदि सिगरेट के डिब्बे पर वैधानिक चेतावनी देकर लोगों को धूम्रपान के प्रति आगाह किया जा सकता है तो लोगों को यह क्यों नहीं बताया जा रहा कि उक्त क्षेत्र में गंगा का पानी पीने या नहाने लायक नहीं है और इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

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जस्टिस ए के गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने एमसी मेहता की याचिका पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को हर 100 किलोमीटर पर डिसप्ले बोर्ड लगाने और वेबसाइट पर सूचना प्रकाशित करने का आदेश दिया।

6 अगस्त को मामले पर फिर सुनवाई होगी। यूपी सरकार की ओर से पेश वकील डॉ संदीप सिंह ने कहा कि गंगा की गुणवत्ता में सुधार के लिए करीब 230 सिफारिश दिए गए हैं। अधिकांश बिंदुओं पर काम हो चुका है। हालांकि पीठ इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई।
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लोगों के जीने के अधिकार की रक्षा की जाए
पीठ ने कहा कि गंगा की इस बदतर स्थिति से अंजान मासूम लोग उसके जल को पूरी श्रद्धा के साथ नहाने, पीने और आचमन के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। यह बेहद जरूरी है कि लोगों के जीने के अधिकार की रक्षा की जाए। कई बच्चे और बड़े प्रदूषित जल पीकर मर रहे हैं। ऐसे में गंगा जल का उपभोग करने वालों के लिए भी डिसप्ले बोर्ड पर नोटिस चस्पा कर जरूर बताया जाए कि यह गंगाजल प्रदूषित है।

उन्नाव के उद्योगों से दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को आदेश दिया है कि वह दो हफ्ते में बताएं कि औद्योगिक क्षेत्र व अन्य गंगा क्षेत्र में अब तक उठाए गए कदमों से गंगा कितनी साफ हुई है। वहीं गंगाजल में सुधार की मौजूदा स्थिति क्या है और आगे की क्या कार्ययोजना है। वहीं उन्नाव में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को हटाने और उनका प्रदूषण रोकने को लेकर क्या किया जा रहा है। 

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