बिहार और उत्तर प्रदेश के 31 जिलों में आकाशीय बिजली के कारण गुरुवार को 116 लोगों की मौत हो गई। इसमें बिहार में 92 और यूपी में 24 मौतें हुई हैं। ऐसा तब हुआ जब भारतीय मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि अगले 72 घंटों में अधिक वज्रपात हो सकता है। दोनों ही राज्यों ने मृतकों के परिजनों के लिए चार-चार लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है।
भारत में हर साल हजारों लोगों की मौत आकाशीय बिजली या वज्रपात की वजह से होती है। एक शोध के अनुसार, 2001 से 2014 के बीच देश में हर साल खराब मौसम की वजह से होने वाली मौत में से 40 प्रतिशत का कारण वज्रपात था। 2005 से हर साल बिजली गिरने से 2,000 से अधिक लोग मारे गए हैं।
2018 में प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुईं 6,891 आकस्मिक मौतों में से 2,357 या 34 प्रतिशत से ज्यादा के लिए वज्रपात जिम्मेदार था। इसका मतलब हुआ कि एक दिन में छह से ज्यादा मौतें। यह आकंड़ा बाढ़ (500), भूस्खलन (404), ठंड (757) और गर्मी (890) में मारे गए लोगों के करीब है। ऐसे में आकाशीय बिजली को भारत की सबसे बड़ी आपदा कहा जा सकता है।