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असल में जान का खतरा या राजनीति: पीएम मोदी हों या केजरीवाल, क्यों खेलते हैं ये विक्टिम कार्ड?

सार

राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि राजनेता जान के खतरे को एक चुनावी पैंतरे के रूप में इस्तेमाल करते हैं। हमारे देश की जनता भावनाओं में बहने वाली है। वह अकसर नेताओं के इन बयानों से खुद को जोड़ लेती है और उनका साथ देने लगती है। जनता की इसी कमी का लाभ उठाते हुए नेता यह विक्टिम कार्ड खेलते हैं...
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अरविंद केजरीवाल और पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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द कश्मीर फाइल्स फिल्म पर अरविंद केजरीवाल के रुख से नाराज भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास पर प्रदर्शन किया। इस दौरान सीएम आवास के बाहर लगे कैमरे और बूम बैरियर तोड़ दिए गए। मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया है कि अरविंद केजरीवाल की जान को खतरा है। उनके मुताबिक, चुनावी हार का बदला लेने के लिए भाजपा केजरीवाल की हत्या कराना चाहती है। लेकिन क्या अरविंद केजरीवाल की जान को वाकई कोई खतरा है? या यह विक्टिम कार्ड है जिसे खेलकर अरविंद केजरीवाल अपने प्रति सहानुभूति बटोरना चाहते हैं।    

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दरअसल, इसके पहले भी आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल की जान को खतरा बताया था। 2019 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक व्यक्ति ने अरविंद केजरीवाल को थप्पड़ मार दिया था। आम आदमी पार्टी ने इस घटना के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया और इसे भी अरविंद केजरीवाल की जान पर हमला बताया। इसके पहले भी उनके साथ कई बार इस तरह की घटनाएं घट चुकी थीं। भाजपा इसे अरविंद केजरीवाल के प्रचार का पैंतरा बताती रही है।  

पीएम ने भी बताया था जान को खतरा

अरविंद केजरीवाल अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्होंने अपनी जान को खतरा बताया है। प्रधानमंत्री मोदी भी कई अवसरों पर अपनी जान को खतरा बता चुके हैं। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों के दौरान जब प्रधानमंत्री पंजाब जा रहे थे, तो उनके रास्ते में बाधा आने के कारण वे रैली स्थल तक नहीं पहुंच सके। उनके काफिले को वापस एयरपोर्ट लौटना पड़ा। एयरपोर्ट वापस आने के बाद पीएम ने जो ट्वीट किया, उससे सियासत गरमा गई।

पीएम ने पंजाब पुलिस अधिकारियों को धन्यवाद देते हुए लिखा कि ‘अपने मुख्यमंत्री को धन्यवाद कहना कि भटिंडा एयरपोर्ट तक मैं जिंदा लौट आया।‘ भाजपा ने इस मुद्दे को पीएम की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ के रूप में प्रचारित किया। पाकिस्तान जैसे देश के संवेदनशील बॉर्डर से कुछ ही दूरी पर पीएम के साथ हुई इस घटना को बेहद गंभीर बताया गया।

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इसके पहले भी प्रधानमंत्री ने नोटबंदी के दौरान कहा था कि कुछ लोग उनकी जान के पीछे पड़े हैं। वे भष्टाचार खत्म करना चाहते हैं, लेकिन इससे नाराज कुछ लोग उनकी हत्या कराना चाहते हैं।

क्या वाकई है जान को खतरा?

राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि राजनेता जान के खतरे को एक चुनावी पैंतरे के रूप में इस्तेमाल करते हैं। हमारे देश की जनता भावनाओं में बहने वाली है। वह अकसर नेताओं के इन बयानों से खुद को जोड़ लेती है और उनका साथ देने लगती है। जनता की इसी कमी का लाभ उठाते हुए नेता यह विक्टिम कार्ड खेलते हैं।

सुरक्षा अधिकारी बताते हैं कि पीएम-सीएम की सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल बेहद सुरक्षित होते हैं। इन उच्च नेताओं के आसपास पहुंचना भी किसी व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता। इनकी सुरक्षा में लगे सुरक्षा अधिकारियों के पास इतनी सुरक्षा सामग्री उपलब्ध होती है कि उनका बाल भी बांका नहीं हो सकता।

नेताओं को कैसे बचाता है ये विक्टिम कार्ड?

एक राजनीतिक विश्लेषक ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री ने जब नोटबंदी के दौरान अपनी जान को खतरा बताया था, उस समय उनकी लोकप्रियता बेहद कम हो गई थी। नोटबंदी के कारण लोगों का कामधंधा चौपट हो गया था, कई लोग बैंकों में लाइन में लगकर अपनी जान तक गंवा रहे थे। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी। ऐसे संकट के समय प्रधानमंत्री ने विक्टिम कार्ड खेला और कहा कि उनकी जान को खतरा है। उन्होंने सबकुछ ठीक करने के लिए केवल 50 दिन का समय मांगा। लेकिन 50 दिन बीत जाने के बाद भी नोटबंदी का संकट नहीं दूर हुआ, लेकिन पीएम की लोकप्रियता एक बार फिर चढ़ गई।    

विपक्ष का आरोप है कि पीएम की पंजाब रैली के दौरान भाजपा की पूरी कोशिश के बाद भी रैली स्थल पर बेहद कम भीड़ जमा थी। लिहाजा सुरक्षा का बहाना बनाकर पीएम ने कार्यक्रम से दूर रहने का बहाना ढूंढ़ लिया। आरोप है कि जान को खतरा बताकर प्रधानमंत्री यहां भी विक्टिम कार्ड खेलना चाहते थे, लेकिन भाजपा की यह कोशिश सफल नहीं हुई। भाजपा की पूरी कोशिश के बाद भी पार्टी राज्य में अपना जनाधार हासिल करने में नाकाम रही।

केजरीवाल का भी विक्टिम कार्ड

भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने इशारा किया है कि अरविंद केजरीवाल भी जान को खतरा बताकर विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश कर रहे हैं। द कश्मीर फाइल्स फिल्म पर विधानसभा सदन में चर्चा के दौरान सीएम अरविंद केजरीवाल और उनके कुछ साथी हंसते हुए दिखाई पड़े थे। इससे लोगों की नजर में आम आदमी पार्टी की साख गिर रही थी। इसी बीच जब भाजपा युवा मोर्चे के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया, तो आम आदमी पार्टी ने इसे अरविंद केजरीवाल की जान पर हमला बता दिया। इसे आम आदमी पार्टी की पूरी बहस को दूसरी दिशा में मोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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