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जनरल की रेस में पिछड़े लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी दे सकते हैं इस्तीफा

Tue, 20 Dec 2016 10:12 PM IST
गुंजन कुमार/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी - फोटो : Wikimedia Commons
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जनरल की रेस में पिछड़े वरिष्ठतम थल सेना अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी समय से पहले फौज छोड़ने का फैसला ले सकते हैं। सेना के हलकों में जबरदस्त चर्चा है कि 1 जनवरी से पहले लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी इस्तीफा या स्वैच्छिक सेवा निवृति (वीआरएस) का रास्ता अपना सकते हैं। 1 जनवरी को सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह रिटायर हो रहे हैं। उनकी जगह लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी से जूनियर नवनियुक्त जनरल बिपिन रावत करीब 13 लाख की संख्या वाली थल सेना की अगुवाई का जिम्मा लेंगे। 
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हालांकि सरकार बख्शी को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) और परमानेंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) जैसा पद देकर उनके आत्मसम्मान और वरिष्ठता बरकरार रखने के विकल्प पर विचार कर रही है। लेकिन यह फैसला भी सरकार के लिए आसान नहीं होगा। रक्षा मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि इस दोनों पद केलिए सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों में सबसे वरिष्ठ अधिकारी इसके योग्य होते हैं। नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी से सीनियर हैं। 

सूत्रों के मुताबिक सरकार बख्शी को सीडीएस या सीओएससी बनाकर नौसेना को क्षुब्ध करने का जोखिम नहीं मोल लेना चाहेगी। गौरतलब है कि करगिल युद्ध के बाद सीडीएस का पद बनाया गया था जो सेना के तीनों अंगों के मद्देनजर सरकार को युद्ध और समारिक नाभकीय मामलों में राय मशविरा देगा। हालांकि अबतक किसी को भी सीडीएस के पद पर नहीं बिठाया जा सका है। रक्षा मंत्री मनोहर परिकर सीडीएस का पद भरने की  वकालत कई बार कर चुकेहैं।
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'बख्शी की तरह हारिज भी इस्तीफा या वीआरएस का फैसला कर सकते हैं'

- फोटो : AmarUjala
सूत्रों के मुताबिक सेना की परंपरा रही है लेफ्टिनेंट जनरल  जैसे उंचे पद पर कोई भी अधिकारी अपने जूनियर के तहत काम नहीं करना चाहेगा। सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल पी एम हारिज की वरिष्ठता को नकारते हुए इनके जूनियर अधिकारी वाईस चीफ बिपिन रावत को सेना प्रमुख बनाने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक बख्शी की तरह हारिज भी इस्तीफा या वीआरएस का फैसला कर सकते हैं। 

फरवरी 2014 में एडमिरल डी के जोशी ने नौसेना में हो रहे हादसों की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया था। तब सरकार ने नंबर दो वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा को एडमिरल बनाने के बजाए उनसे जूनियर वाइस एडमिरल को रोबिन धवन को नौसेना की कमान सौंप दी थी। सरकार के  इस फैसले के बाद शेखर सिन्हा ने वीआरएस ले  लिया था।
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