जनरल की रेस में पिछड़े वरिष्ठतम थल सेना अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी समय से पहले फौज छोड़ने का फैसला ले सकते हैं। सेना के हलकों में जबरदस्त चर्चा है कि 1 जनवरी से पहले लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी इस्तीफा या स्वैच्छिक सेवा निवृति (वीआरएस) का रास्ता अपना सकते हैं। 1 जनवरी को सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह रिटायर हो रहे हैं। उनकी जगह लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी से जूनियर नवनियुक्त जनरल बिपिन रावत करीब 13 लाख की संख्या वाली थल सेना की अगुवाई का जिम्मा लेंगे।
हालांकि सरकार बख्शी को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) और परमानेंट चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) जैसा पद देकर उनके आत्मसम्मान और वरिष्ठता बरकरार रखने के विकल्प पर विचार कर रही है। लेकिन यह फैसला भी सरकार के लिए आसान नहीं होगा। रक्षा मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि इस दोनों पद केलिए सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों में सबसे वरिष्ठ अधिकारी इसके योग्य होते हैं। नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी से सीनियर हैं।
सूत्रों के मुताबिक सरकार बख्शी को सीडीएस या सीओएससी बनाकर नौसेना को क्षुब्ध करने का जोखिम नहीं मोल लेना चाहेगी। गौरतलब है कि करगिल युद्ध के बाद सीडीएस का पद बनाया गया था जो सेना के तीनों अंगों के मद्देनजर सरकार को युद्ध और समारिक नाभकीय मामलों में राय मशविरा देगा। हालांकि अबतक किसी को भी सीडीएस के पद पर नहीं बिठाया जा सका है। रक्षा मंत्री मनोहर परिकर सीडीएस का पद भरने की वकालत कई बार कर चुकेहैं।