अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति
- फोटो : Amar Ujala
दूरबीन से सीमा पार निरीक्षण
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दूरबीन से सीमा-पार का निरीक्षण किया
छात्रों ने दूरबीन से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार स्थित पाकिस्तानी चौकियों का निरीक्षण किया। तीर कमान से निशाना भी लगाया। मौके पर उपस्थित आर्मी के जवानों ने बताया कि यहां से करीब दो किलोमीटर दूर सतलुज नदी पंजाब से होकर पाकिस्तान में बहती है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर पहुंचकर भारतीय सेना को करीब से देख पाना बच्चों के लिए उत्साह और प्रेरणा से भरपूर रहा। अपनी इस यात्रा के बाद कई बच्चों ने आर्मी में जाने का निर्णय लिया है।
Atul Maheshwari scholarship
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बच्चों ने साझा किए अपने अनुभव
भारतीय सेना के साथ दो दिन बिताने के बाद लगा कि देश को यही संभाले हैं, आज हम सुकून के साथ अपने घरों में सो पा रहे हैं, तो इसके पीछे भी भारतीय सेना का त्याग और बलिदान ही है।
हर्षित तिवारी (लखीमपुर खीरी)
अमर उजाला के साथ दो दिन के टूर में मैंने इंडियन आर्मी को इतने करीब से देखा। मैंने सिविल सर्विसेज में जाने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन अब मेरा मन करता है कि मैं आर्मी में जाऊं।
दीप्ति (हिसार)
अमर उजाला के कारण आर्मी कैंप में हथियारों और उनके वाहनों को करीब से देखा। ये मेरे लिए अविश्वसनीय पल रहा। मैंने सपने भी ऐसा नहीं सोचा था। खासकर मेरे मन में आर्मी के प्रति मान सम्मान बेहद बढ़ गया है।
मुश्कान राजपूत (कठुआ)
इस ट्रिप पर अपनी आर्मी को इतने करीब से देखने का मौका मिला। जवानों का सेवा भाव देखकर ऐसा लगा कि हमारी सेना के जवान कितनी तमीज और तहजीब से पेश आते हैं, मुझे भी आर्मी में जाकर देश की सेवा करनी है।
प्रियांशी राजपूत (कठुआ)