16 करोड़ 20 लाख 78 हजार 67 शेयर बिक्री के लिए रखे गए हैं। इसमें से अभी तक 10.75 करोड़ शेयरों के लिए निवेशकों ने बोली लगाई। इसमें सबसे ज्यादा हिस्सा पॉलिसीधारकों का भरा जो 1.95 गुना था। कर्मचारियों का हिस्सा 1.15 गुना भरा।
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी IPO लॉन्च हो चुका है। देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बुधवार की सुबह 10 बजे सब्सक्रिप्शन के लिए खुला और शाम तक 66% सब्सक्राइब हो गया। पॉलिसी होल्डर्स के लिए रिजर्व किया गया कुल शेयर्स का 10% हिस्सा ओवरसब्सक्राइब्ड हो गया। मतलब इसके लिए दो गुना बोली लगाई जा चुकी है।
विज्ञापन
16 करोड़ 20 लाख 78 हजार 67 शेयर बिक्री के लिए रखे गए हैं। इसमें से अभी तक 10.75 करोड़ शेयरों के लिए निवेशकों ने बोली लगाई। इसमें सबसे ज्यादा हिस्सा पॉलिसीधारकों का भरा जो 1.95 गुना था। कर्मचारियों का हिस्सा 1.15 गुना भरा। गैर संस्थागत निवेशकों (एनआईआई) का हिस्सा सबसे कम केवल 27 फीसदी जबकि खुदरा निवेशकों का हिस्सा 60 फीसदी भरा। निवेशकों को 9 मई तक पैसा लगाने का मौका मिलेगा। हालांकि जानकारों का मानना है कि रिजर्व बैंक के दरों को बढ़ाने के फैसले से आईपीओ पर असर दिख सकता है।
आईपीओ को लेकर लोगों में खूब चर्चा है। ऐसे में हम आपको एलआईसी के आईपीओ से जुड़ी हर एक जानकारी बताने जा रहे हैं। आइए समझते हैं...
विज्ञापन
पहले एलआईसी के बारे में जान लीजिए
एलआईसी
देश की आजादी के समय बीमा के क्षेत्र में ज्यादातर निजी कंपनियां ही काम कर रहीं थीं। ऐसे में सरकार ने इस क्षेत्र में कदम बढ़ाया। केंद्र सरकार ने 19 जून 1956 को संसद में लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन एक्ट पारित किया। एक सितंबर 1956 को भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी की स्थापना हो गई।
कई प्राइवेट कंपनियों को अधिग्रहित करके एलआईसी जब अस्तित्व में आई तब यहां 27 हजार कर्मचारी काम करते थे। पहले ही दिन कंपनी के पास 50 हजार पॉलिसी धारक हो गए। इस तरह से पहले ही दिन सबसे ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी में ये शामिल हो गया। इस समय कंपनी में करीब एक लाख कर्मचारी हैं और 30 करोड़ से ज्यादा बीमा पॉलिसी।
आईपीओ क्या होता है?
एलआईसी
- फोटो : अमर उजाला
IPO यानी इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग। सरल तरीके से समझें तो एक कंपनी जब अपने समान्य स्टॉक या शेयर को पहली बार जनता के लिए जारी करता है तो उसे आईपीओ कहते हैं। लिमिटेड कंपनियों द्वारा आईपीओ इसलिए जारी किया जाता है जिससे वह शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो सके। शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद कंपनी के शेयरों की खरीद शेयर बाजार में हो पाती है। कंपनी निवेश या विस्तार करने की हालत में फंडिंग इकट्ठा करने के लिए आईपीओ जारी करती है।
आईपीओ दो तरह के होते हैं-
1. फिक्स्ड प्राइस आईपीओ
फिक्स्ड प्राइस आईपीओ को इश्यू प्राइस भी कहा जा सकता है। कुछ कंपनियां अपने शेयरों की प्रारंभिक बिक्री के लिए निर्धारित करती हैं। निवेशकों को उन शेयरों की कीमत के बारे में पता चलता है जिन्हें कंपनी सार्वजनिक करने का फैसला करती है। इश्यू बंद होने के बाद बाजार में शेयरों की मांग का पता लगाया जा सकता है। यदि निवेशक इस आईपीओ में हिस्सा लेते हैं, तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे आवेदन करते समय शेयरों की पूरी कीमत का भुगतान करें।
2. बुक बिल्डिंग आईपीओ
ऐसी स्थिति में कंपनी निवेशकों को शेयरों पर 20% मूल्य बैंड प्रदान करती है। इच्छुक निवेशक अंतिम कीमत तय होने से पहले शेयरों पर बोली लगाते हैं। यहां निवेशकों को उन शेयरों की संख्या बतानी होती है, जिन्हें वे खरीदना चाहते हैं और वह राशि जो वे प्रति शेयर भुगतान करने को तैयार हैं।
सबसे कम शेयर की कीमत को फ्लोर प्राइस के रूप में जाना जाता है और उच्चतम स्टॉक मूल्य को कैप प्राइस के रूप में जाना जाता है। शेयरों की कीमत के संबंध में अंतिम निर्णय निवेशकों की बोलियों द्वारा निर्धारित किया जाता है।
एलआईसी आईपीओ
- फोटो : अमर उजाला
एलआईसी का आईपीओ क्यों आया?
केंद्र सरकार ने डिसइन्वेस्टमेंट के बड़े टारगेट्स रखे हैं। एलआईसी का आईपीओ लॉन्च करना इसी का एक हिस्सा है। इसके जरिए सरकार एलआईसी की 3.5% हिस्सेदारी बेच रही है। इससे 21,000 करोड़ रुपए जुटाने की योजना है।
जिन्होंने एलआईसी पॉलिसी ले रखी, उन्हें क्या फायदा?
अगर आपके पास एलआईसी की पॉलिसी है तो आपको प्रति शेयर 60 रुपए का डिस्काउंट मिलेगा। रिजर्वेशन हिस्से के तहत एलआईसी पॉलिसी होल्डर्स के लिए 10% (2.21 करोड़ शेयर) शेयर रिजर्व रखा गया है।
902 से 949 रुपये तक इसकी कीमत तय हुई है। एक लॉट में 15 शेयर होगा। पॉलिसी धारक न्यूनतम 12 हजार 635 रुपये निवेश कर सकते हैं। आम निवेशक 13 हजार 530 रुपये तक निवेश कर सकते हैं।
निवेशकों को कैसे फायदा मिल सकता है?
अगर आप पॉलिसी धारक कोटे से आईपीओ के लिए आवेदन करते हैं तो फिर कम से कम 13,335 रुपए लगाने होंगे।
जबकि एक आम निवेशक को अपर प्राइस बैंड के मुताबिक 14,235 रुपए देने होंगे। इस तरह से पॉलिसी धारक को एक लॉट आईपीओ के आवेदन पर कुल 900 रुपए का डिस्काउंट मिलेगा।
वहीं अगर आप पॉलिसी धारक कोटे से आईपीओ में लोअर प्राइस बैंड के हिसाब से कम से कम 12,635 रुपए देने होंगे। जबकि आम निवेशक को अपर प्राइस बैंड के मुताबिक 13,530 रुपए लगाने होंगे।
डिस्काउंट मिलने से क्या फायदा होगा?
आप पॉलिसी धारक कोटे में आवेदन करते हैं और आपको अपर प्राइस बैंड के हिसाब से एक लॉट मिल जाता है। ऐसे में अगर शेयर मार्केट में शेयर 949 रुपए में भी लिस्टेड होता है तब भी आपको प्रति शेयर 60 रुपए का फायदा तो मिलेगा ही। बाकी अगर ये 949 से ऊपर लिस्ट होता है तो वो फायदा अलग मिलेगा। इसके अलावा अगर ये शेयर 60 रुपए तक कम कीमत पर भी लिस्ट होता है तब भी आपको नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।
कैसे खरीद सकते हैं शेयर?
इसके लिए आपके पास डीमैट अकाउंट होना जरूरी है। सेबी नियमों के मुताबिक किसी भी कंपनी के इक्विटी शेयर केवल डीमैट रूप में ही जारी होते हैं। इसलिए कोई भी, चाहे पॉलिसी होल्डर्स हो या रिटेल निवेशक, उसके पास एक डीमैट खाता होना जरूरी है।
इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प है। अगर आप ऑनलाइन आवेदन करना चाहते हैं तो आपको अपने डीमैट अकाउंट या इसके ऐप के जरिए आवेदन कर सकते हैं। यहां आपको 3 कैटेगरी का विकल्प दिखेगा।
1. रिटेल
2. पॉलिसी होल्डर
3. एम्प्लॉई (कर्मचारी)
आप जिस कैटेगिरी के लिए अप्लाय करना चाहते हैं उस पर क्लिक करें। इसके बाद आप कितने लॉट के चाहते हैं वो भरें। इसके बाद आपके अकाउंट से लॉट की कीमत का पैसा लीन (ब्लॉक) हो जाएगा। ऐसे में 12 मई को जब शेयर अलॉटमेंट में अगर आपको शेयर मिलते हैं तो आपके अकाउंट से पैसा कट जाएगा और 16 मई को आपके डीमैट अकाउंट में शेयर आ जाएंगे। इसके बाद एलआईसी का शेयर 17 मई को मार्केट में लिस्ट हो जाएगा।
लेकिन, अगर आपको शेयर नहीं मिलते हैं तो 13 मई से आपके पैसे को अनब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके एक दो दिन बाद आपका पैसा अनब्लॉक हो जाएगा।
अगर आप ऑफलाइन अप्लाय करना चाहते हैं तो आपको एलआईसी ऑफिस या अपनी डीमैट अकाउंट कंपनी के ऑफिस में संपर्क करना होगा।